मेरठ में युवक की जिंदा जलाकर हत्या से सनसनी

मेरठ में युवक की जिंदा जलाकर हत्या से सनसनी

मेरठ जनपद के सरधना क्षेत्र में कश्यप समाज के युवक रानू कश्यप की जिंदा जलाकर हत्या ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया और घटना के बाद से फरार हैं।

अपराधियों की गिरफ्तारी न होने से उठे सवाल

घटना के कई दिन बीतने के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इससे स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी है। उनका कहना है कि इतनी गंभीर वारदात के बावजूद पुलिस की कार्रवाई सुस्त दिखाई दे रही है। क्षेत्र में लगातार विरोध की चर्चाएं हैं और लोग इसे कानून-व्यवस्था पर गंभीर धब्बा बता रहे हैं।

मेरठ के सरधना क्षेत्र में युवक सोनू कश्यप की जिंदा जलाकर हत्या के बाद परिजन विलाप करते हुए हाथों में तख्तियां थामे, सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए।

कश्यप समाज में रोष, पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अडिग

रानू कश्यप की दर्दनाक मौत ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। सामाजिक संगठनों और कश्यप समाज के प्रतिनिधियों ने घटना को अमानवीय बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए, क्योंकि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और डर का माहौल बना हुआ है। साथ ही समाज का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया बिना दबाव व बिना भेदभाव के संपन्न होनी चाहिए।

प्रदेश सरकार के सामने चार बड़ी मांगें

पीड़ित पक्ष और सामाजिक संगठनों ने प्रदेश सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

1. तत्काल गिरफ्तारी: नामजद आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।

2. निष्पक्ष जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष व तेज जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए।

3. सुरक्षा व सहयोग: पीड़ित परिवार को सुरक्षा के साथ न्यायिक प्रक्रिया में सरकारी सहयोग मिले।

4. रोजगार व मुआवजा: मृतक के परिवार को आर्थिक मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

घटना से कानून-व्यवस्था पर फिर खड़ा हुआ सवाल

प्रदेश में हाल के दिनों में बढ़ते आपराधिक मामलों के बीच यह घटना सरकार के लिए चुनौती बन गई है। विपक्ष भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सवाल उठा रहा है कि जब अपराधी खुलेआम हों और परिवार दहशत में, तो आम जनता का भरोसा कैसे सुरक्षित रहेगा। अब निगाहें पुलिस प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।

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