मैनपुरी में चक्रवाती ‘अर्णब’ तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। किसानों एवं पशुपालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने तुरंत व्यापक एडवाइजरी जारी कर दी है।
प्रदेश सरकार की किसान हितैषी प्राथमिकताओं के तहत स्थानीय प्रशासन ने किसी भी संभावित प्राकृतिक चुनौती से निपटने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के तुरंत बाद उप निदेशक कृषि और आपदा प्रबंधन की टीमों को सक्रिय कर दिया गया है, जिससे अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।
फसलों के बचाव के लिए किसानों को अहम निर्देश
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम के मिजाज को देखते हुए सतर्कता बरतें और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों का उपयोग कर अपनी उपज को सुरक्षित करें:
- कटी फसलों का सुरक्षित भंडारण: खेतों में कटी रखी फसलों को खुले में न छोड़ें। इन्हें तिरपाल अथवा सुरक्षित शेड के नीचे रखें ताकि तेज हवा और बारिश से नुकसान न हो।
- सिंचाई व रासायनिक छिड़काव स्थगित: आगामी कुछ दिनों तक खेतों में सिंचाई करने और किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव करने से बचें।
- जल निकासी के पुख्ता इंतजाम: निचले स्तर के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए नालियों को पहले से साफ व सुचारू रखें।
पशुपालकों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक एडवाइजरी
पशुधन के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पशुपालन विभाग ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। तेज आंधी-तूफान के दौरान मवेशियों को जोखिम से दूर रखने के लिए स्पष्ट सुझाव दिए गए हैं:
- मवेशियों को कच्चे, जर्जर छप्परों अथवा बड़े पेड़ों के नीचे न बांधें; उन्हें पक्के और सुरक्षित स्थानों पर ही रखें।
- पशुओं के लिए सूखे चारे व भूसे को सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि सीलन या फफूंद से चारे की बर्बादी न हो।
- बारिश के दौरान दूषित पानी से होने वाले संक्रमण से बचाने के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार किसानों की आय और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। जिले के सभी विकास खंडों में कृषि व पशुपालन विभाग के फील्ड कर्मचारी तैनात हैं, जो ग्रामीणों को हर संभव सहायता और सही जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
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