असम में दर्दनाक रेल हादसा: राजधानी एक्सप्रेस के 5 कोच पटरी से उतरे, 7 हाथियों की मौत

 


असम में दर्दनाक रेल हादसा: राजधानी एक्सप्रेस के 5 कोच पटरी से उतरे, 7 हाथियों की मौत


असम में ट्रेन–हाथी टक्कर से हड़कंप

असम में एक गंभीर और दिल दहला देने वाला रेल हादसा सामने आया है। यहां राजधानी एक्सप्रेस के पांच कोच पटरी से उतर गए, जबकि ट्रेन की चपेट में आने से सात जंगली हाथियों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना उस क्षेत्र में हुई जो गुवाहाटी से लगभग 126 किलोमीटर दूर स्थित है। अधिकारियों के अनुसार, हादसे की जगह किसी भी अधिसूचित हाथी कॉरिडोर में शामिल नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यहां हाथियों की आवाजाही पहले भी देखी जाती रही है।

इस हादसे के बाद न केवल रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी गंभीर बहस शुरू हो गई है।

 


हादसा कैसे हुआ: शुरुआती जांच में क्या सामने आया

रेलवे और वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, राजधानी एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग पर तेज रफ्तार से गुजर रही थी। इसी दौरान अचानक हाथियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पर आ गया। घना अंधेरा और सीमित दृश्यता होने के कारण लोको पायलट को हाथियों की मौजूदगी का समय पर अंदाजा नहीं हो सका।

टक्कर इतनी भीषण थी कि इंजन के पीछे लगे पांच कोच पटरी से उतर गए। हादसे के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी यात्री की मौत नहीं हुई, लेकिन कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आईं, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।


7 हाथियों की मौत, वन विभाग में शोक और चिंता

इस हादसे में सात हाथियों की दर्दनाक मौत ने वन विभाग और पर्यावरणविदों को झकझोर कर रख दिया है। वन अधिकारियों ने बताया कि मृत हाथियों में वयस्क और कम उम्र के हाथी दोनों शामिल हैं। घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे इलाके को घेर लिया और शवों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका भले ही सरकारी रिकॉर्ड में हाथी कॉरिडोर न हो, लेकिन हाथियों के पारंपरिक मूवमेंट रूट का हिस्सा माना जाता है।


रेलवे की त्वरित कार्रवाई

हादसे के तुरंत बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। प्रभावित ट्रैक पर रेल यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिससे कई ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा। यात्रियों को वैकल्पिक साधनों से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार—

  • दुर्घटनाग्रस्त कोचों को हटाने के लिए रेस्क्यू ट्रेन भेजी गई
  • ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा जांच शुरू की गई
  • हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी।


हाथी कॉरिडोर न होने पर भी क्यों हुआ हादसा?

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अधिसूचित हाथी कॉरिडोर ही पर्याप्त हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि—

  • कई ऐसे इलाके हैं जहां हाथी नियमित रूप से आते-जाते हैं
  • लेकिन उन्हें आधिकारिक कॉरिडोर का दर्जा नहीं मिला है
  • रेलवे ट्रैक इन क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है

विशेषज्ञों का सुझाव है कि रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल इस तरह की घटनाओं को रोक सकता है।


पूर्वोत्तर में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

यह पहली बार नहीं है जब असम या पूर्वोत्तर भारत में ट्रेन और हाथियों की टक्कर हुई हो। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें दर्जनों हाथियों की जान जा चुकी है।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों का मानना है कि बढ़ता रेलवे नेटवर्क, जंगलों में मानवीय दखल और ट्रेनों की तेज रफ्तार हाथियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।


भविष्य में हादसे रोकने के लिए क्या जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए—

  • संवेदनशील इलाकों में ट्रेनों की गति सीमित की जाए
  • रेलवे ट्रैक के पास अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाए जाएं
  • ड्रोन और थर्मल कैमरों से निगरानी बढ़ाई जाए
  • वन्यजीव मूवमेंट के नए डेटा के आधार पर नए कॉरिडोर चिन्हित किए जाएं

असम में राजधानी एक्सप्रेस से हुआ यह हादसा केवल एक रेल दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह मानव विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच टकराव की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ संरक्षित वन्यजीवों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। अब सभी की नजरें रेलवे जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदमों पर टिकी हैं।


 

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top