यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: बदायूं एसएसपी बृजेश हटे, 7 IPS सहित कई IAS-PCS अधिकारियों के तबादले

यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: बदायूं एसएसपी बृजेश हटे, 7 IPS सहित कई IAS-PCS अधिकारियों के तबादले

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर कई आईएएस, पीसीएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। बदायूं में हाल ही में हुए डबल मर्डर के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जिले के एसएसपी बृजेश को हटा दिया है। इसके साथ ही चार जिलों के पुलिस कप्तानों सहित कुल सात आईपीएस अधिकारियों का भी स्थानांतरण किया गया है।

सरकार का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों में कार्यों की गति तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है। शासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक तबादला सूची भी जारी कर दी गई है, जिसमें कई महत्वपूर्ण विभागों में नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बदायूं डबल मर्डर के बाद कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हाल ही में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद सरकार ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जिले के एसएसपी बृजेश को पद से हटा दिया। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महकमे में भी बड़ा बदलाव किया गया है।

सूत्रों के अनुसार सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। यही कारण है कि घटना के बाद पुलिस प्रशासन में जवाबदेही तय करते हुए कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। चार जिलों के पुलिस कप्तानों सहित कुल सात आईपीएस अधिकारियों का तबादला इस कार्रवाई का हिस्सा है।

सरकारी सूत्रों का मानना है कि इस बदलाव से प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और प्रशासनिक नियंत्रण भी मजबूत होगा।

IAS अधिकारियों के तबादले: कई विभागों में नई जिम्मेदारियां

राज्य सरकार ने इस फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। कुल सात वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें कुछ ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं जो अब तक प्रतीक्षारत थे और उन्हें नई तैनाती दी गई है।

प्रकाश बिंदु को सचिव, लोक निर्माण विभाग (PWD) से हटाकर अब गृह विभाग का सचिव बनाया गया है। गृह विभाग राज्य प्रशासन का बेहद अहम विभाग माना जाता है, इसलिए इस पद पर उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

डॉ. लोकेश एम., जो अब तक प्रतीक्षारत थे, उन्हें सचिव, लोक निर्माण विभाग के पद पर नियुक्त किया गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग राज्य में सड़क और अधोसंरचना विकास से जुड़ा प्रमुख विभाग है।

श्रीमती नीना शर्मा, जो अभी तक उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी की निदेशक थीं, उन्हें अब प्रमुख सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग और साथ ही महानिदेशक (सार्वजनिक उद्यम) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

वहीं संजय कुमार को महानिदेशक, सार्वजनिक उद्यम के पद से हटाकर निदेशक, उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी बनाया गया है।

इसके अलावा:

  • महेन्द्र प्रसाद (प्रतीक्षारत) को विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग बनाया गया है।

  • रघुबीर को विशेष सचिव, धर्मार्थ कार्य विभाग से स्थानांतरित कर विशेष सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में भेजा गया है।

  • आशीष कुमार, जो राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक हैं, उन्हें उनके वर्तमान पद के साथ-साथ विशेष सचिव, धर्मार्थ कार्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

इन नियुक्तियों को प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

PCS अधिकारियों के भी हुए तबादले

राज्य सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के लिए कई पीसीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया है।

सुरेन्द्र कुमार, जो अभी तक अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), मथुरा के पद पर कार्यरत थे, उन्हें प्रमोट कर अपर आयुक्त, कानपुर मंडल बनाया गया है।

वेद प्रिय आर्य, जो उप जिलाधिकारी, जालौन थे, उन्हें अब अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), मथुरा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गुलाब सिंह, जो बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (झांसी) में विशेष कार्याधिकारी के रूप में कार्य कर रहे थे, उन्हें अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), कुशीनगर बनाया गया है।

वहीं प्रदीप कुमार सिंह-2, जो उप जिलाधिकारी, झांसी थे, उनका तबादला कर उप जिलाधिकारी, गोंडा नियुक्त किया गया है।

सरकार का कहना है कि इन बदलावों से जिलों और मंडलों में प्रशासनिक कार्यों की गति तेज होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रशासनिक कसावट लाने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर प्रशासनिक फेरबदल करती रहती है ताकि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सके।

हाल के महीनों में राज्य में कई विकास योजनाएं और बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से हो और अधिकारियों की जवाबदेही स्पष्ट रहे।

गृह विभाग, लोक निर्माण विभाग और सार्वजनिक उद्यम जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नए अधिकारियों की नियुक्ति से इन क्षेत्रों में नीतिगत निर्णयों और परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

कानून-व्यवस्था और विकास दोनों पर फोकस

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का यह कदम दो प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखकर उठाया गया है—पहला, प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और दूसरा, विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना।

बदायूं की घटना के बाद पुलिस प्रशासन में किया गया बदलाव यह संकेत देता है कि सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है। वहीं दूसरी ओर आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादलों के जरिए प्रशासनिक ढांचे को अधिक सक्रिय और परिणाम-केंद्रित बनाने की कोशिश की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को शासन की कार्यशैली में तेजी और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। बदायूं डबल मर्डर के बाद पुलिस प्रशासन में की गई कार्रवाई और साथ ही आईएएस-पीसीएस अधिकारियों के तबादले यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक दक्षता दोनों को प्राथमिकता दे रही है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए अधिकारियों की तैनाती से प्रदेश के विभिन्न विभागों और जिलों में प्रशासनिक कार्यों की गति किस तरह बढ़ती है और जनता को इसका कितना लाभ मिलता है।

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