Battle Is Not Over Yet: BMC हार पर ठाकरे कजिन्स का बड़ा बयान, मराठियों के साथ खड़े रहने का संकल्प

Battle Is Not Over Yet Thackeray cousins react to BMC debacle vow to stand by Marathis

Battle Is Not Over Yet Thackeray cousins react to BMC debacle vow to stand by Marathis

मुंबई: Battle Is Not Over Yet — यही संदेश है उस प्रतिक्रिया का जिसे महाराष्ट्र के प्रमुख नेता और थॉकराय परिवार के कजिन्स ने 2026 के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के नतीजों के बाद दिया है। भले ही चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि मराठी समुदाय के हित और मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए उनकी लड़ाई अब भी जारी रहेगी।

BMC चुनाव का संक्षिप्त परिणाम

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), देश का सबसे बड़ा नगरीय निकाय है, और इसका राजनीतिक महत्व अत्यधिक है। 2026 के BMC चुनावों में राज थॉकराय की महाराष्ट्र निर्माण सेना (MNS) और उद्धव थॉकराय की शिव सेना-UBT (Uddhav Balasaheb Thackeray) की जोड़ी ने मिलकर चुनाव लड़ा। हालांकि परंपरागत मराठी क्षेत्र जैसे दादर-महिम, वॉर्ली-सेवरी और लालबाग-परेल में उन्हें समर्थन मिला, लेकिन पूरे शहर में उनका प्रदर्शन अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया।

कुल 227 सीटों में से UBT-MNS गठबंधन ने लगभग 71 सीटें जीतीं, जो उनके पारंपरिक इलाके में बल पाने का संकेत देती हैं, लेकिन यह संख्या BMC में बहुमत हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

“Battle Is Not Over Yet”: Cousins का पहला बयान

जैसे ही BMC चुनाव के परिणाम घोषित हुए, थॉकराय कजिन्स — उद्धव थॉकराय और राज थॉकराय — ने अपने समर्थकों और मराठी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि “Battle Is Not Over Yet”, यानी “जंग अभी खत्म नहीं हुई है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हार उनके संघर्ष और मराठी अस्मिता की लड़ाई का अंत नहीं है, बल्कि एक चुनौतीपूर्ण पड़ाव मात्र है। ऐसा वे इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि मराठी लोगों के हितों की रक्षा और मराठी संस्कृति तथा पहचान को सुरक्षित रखना राजनीतिक प्राथमिकता है, और वह यह काम जारी रखेंगे चाहे चुनाव परिणाम कुछ भी हों।

हार के बावजूद मराठी समुदाय के प्रति वचनबद्धता

राज थॉकराय ने अपने बयान में कहा कि चुनावों में मिली हार निराशाजनक है, लेकिन इससे उनका मराठी लोगों के प्रति वचन कमज़ोर नहीं होगा। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें आत्म-समीक्षा करनी चाहिए कि कहां गलती हुई और आने वाले समय में कैसे मजबूत रणनीति बनाई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि मराठी लोगों के अधिकार और संस्कृति के लिए संघर्ष केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। राज थॉकराय के अनुसार, मराठी समुदाय की आकांक्षाओं के प्रति प्रतिबद्धता चुनाव के परिणामों से परे है और उन्हें इसके लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

मराठी अस्मिता और राजनीतिक संदेश

थॉकराय कजिन्स ने चुनावों में मोर्चा “सेव मराठी” (Save Marathis) और मराठी लोगों के हितों पर केंद्रित किया था। उनके रणनीतिक गठबंधन का मकसद था मराठी भाषियों की राजनीतिक पहचान और जागरूकता को मजबूत बनाना। इस चुनावी आसन के पीछे यह पहचान थी कि BMC जैसे नगरीय निकाय पर मराठी समुदाय की पैठ और अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में उनकी पकड़ मजबूत रही, लेकिन शहर भर में व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण यह है कि BMC चुनाव में केवल मराठी पहचान का मुद्दा काफी नहीं रहा, और अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों का भी प्रभाव रहा।

विपक्षी दलों के प्रदर्शन और राजनीतिक बदलाव

इस चुनाव में विपक्ष और मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी-महा-युति गठबंधन ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। बीजेपी और उसके सहयोगियों ने न सिर्फ BMC में बहुमत हासिल किया बल्कि थॉकराय गठबंधन की पारंपरिक मजबूतियों को चुनौती भी दी।

बीजेपी ने विकास, बेहतर शहरी सेवाओं और प्रशासनिक सुगमता जैसे मुद्दों को चुनाव के केंद्र में रखा। इस रणनीति ने कुछ वार्डों में मराठी-आधारित पहचान राजनीति के मुकाबले अधिक समर्थन हासिल किया, जिससे थॉकराय गठबंधन को चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

हार के बाद रणनीतिक आत्म-विश्लेषण

राज थॉकराय के बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया कि टीम अब आत्म-विश्लेषण करेगी और यह देखने की कोशिश करेगी कि किस क्षेत्र में कमी रही, और किस प्रकार की रणनीति आगामी चुनावों में ज़्यादा प्रभावी हो सकती है। उन्होंने कहा कि हार का मतलब हार मान लेना नहीं है, बल्कि सीखना और सुधार करना है।

उन्होंने कहा कि मराठी समुदाय की नीतियों और आकांक्षाओं को समझने में और गहराई से काम करना होगा। राज थॉकराय के अनुसार, “लड़ाई लंबी है और यह केवल चुनावी लड़ाई नहीं, सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संघर्ष है।”

उद्धव थॉकराय का संदेश: मराठी की अस्मिता अब भी जिंदा

उद्धव थॉकराय ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उस हार का अर्थ यह नहीं है कि उनका संघर्ष समाप्त हो गया है। उन्होंने अपने समर्थकों को याद दिलाया कि मराठी सत्ता और मराठी दिलों पर नियंत्रण उनके हाथों से नहीं गया है।

उनका मानना है कि मराठी लोग आज भी अपने समुदाय और पहचान के मुद्दों को लेकर सजग हैं। इसके अलावा उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगे की चुनौतियों के लिए तैयारी जारी रखने का आह्वान किया।

BMC Debacle के व्यापक राजनीतिक असर

BMC चुनाव परिणाम का असर सिर्फ मुंबई नगरनिगम तक सीमित नहीं है। यह महाराष्ट्र की राजनीति में व्यापक बदलाव का संकेत भी देता है। पारंपरिक regional power जैसे शिव सेना और MNS को चुनौती मिल रही है, जिससे राज्य की राजनैतिक दिशा पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा इसी परिणाम से प्रभावित हो सकती है, क्योंकि शहरी मतदाताओं के रुझान निकट भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को परिभाषित करेंगे।

मराठी समुदाय की प्रतिक्रिया

मराठी समुदाय ने mixed प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ ने थॉकराय कजिन्स की भावना और मराठी संस्कृति के प्रति समर्पण की सराहना की है, जबकि अन्य ने कहा है कि भविष्य की राजनीति में अधिक व्यापक और विकास-उन्मुख एजेंडा की आवश्यकता है।

यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि मराठी पहचान राजनीति अब अकेला मुद्दा नहीं रहा, बल्कि शहरी विकास, रोज़गार, सुविधा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

भविष्य की रणनीति और राजनीति

थॉकराय कजिन्स के बयान से स्पष्ट है कि वे हार को एक अंतिम परिणाम नहीं मानते। उन्होंने कहा कि अगली रणनीति में जातिगत राजनीति, पहचानवाद के साथ ही आधुनिक शहरी चुनौतियों को भी शामिल किया जाएगा।

राज और उद्धव दोनों के बयान यह संकेत देते हैं कि वे मराठी समुदाय के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने की योजना रखते हैं ताकि आगामी चुनावों और राजनीतिक आंदोलनों में एक मजबूत भूमिका निभाई जा सके।

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