‘कोडिंग कांड’ का आरोप: राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने BJP के साथ चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल, वोट कटने का लगाया गंभीर दावा
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह “कोडिंग कांड” के जरिए चुनावों को प्रभावित कर रही है और समाजवादी पार्टी के मजबूत बूथों पर सुनियोजित तरीके से वोट कटवाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में उन्होंने न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
अखिलेश यादव का दावा है कि प्रोफेशनल एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उन क्षेत्रों को टारगेट किया जा रहा है, जहां समाजवादी पार्टी का जनाधार मजबूत है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी तरीके से फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं, जिसके माध्यम से मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवाए जा रहे हैं।


क्या है ‘कोडिंग कांड’ का आरोप?
सपा प्रमुख के अनुसार, “कोडिंग कांड” कोई सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने ऐसे “कोडिंग एक्सपर्ट्स” पाल रखे हैं, जो डिजिटल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों के वोट बैंक को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम काटने के लिए तकनीकी प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और यह सब खासतौर पर उन बूथों पर हो रहा है, जहां समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। अखिलेश के मुताबिक, यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे जनता के मतदान के अधिकार पर सीधा हमला होता है।
फॉर्म-7 को लेकर उठे सवाल
अखिलेश यादव ने अपने आरोपों में फॉर्म-7 का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस फॉर्म का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में इसका दुरुपयोग हो रहा है। सपा प्रमुख का दावा है कि बिना मतदाता की जानकारी और सहमति के फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के वोट कट रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब आम लोग अपने वोट कटने की शिकायत लेकर जाते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। अखिलेश के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
गवाह नंदलाल को किया पेश, 1 लाख की मदद का ऐलान
अपने आरोपों को और मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव ने एक व्यक्ति नंदलाल को सामने लाया, जिसे उन्होंने “गवाह” बताया। अखिलेश का कहना है कि नंदलाल के साथ जो हुआ, वह इस कथित धांधली का प्रत्यक्ष उदाहरण है। सपा प्रमुख ने नंदलाल की आर्थिक मदद के लिए 1 लाख रुपये देने की घोषणा भी की।
अखिलेश ने कहा कि ऐसे कई लोग हैं, जिनके वोट बिना वजह काटे गए हैं, लेकिन डर और संसाधनों की कमी के कारण वे सामने नहीं आ पा रहे। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ऐसे सभी लोगों के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
अखिलेश यादव के बयान का सबसे संवेदनशील हिस्सा चुनाव आयोग को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग समय रहते इन मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सपा प्रमुख के मुताबिक, लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका सबसे अहम होती है और उस पर जनता का भरोसा बना रहना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से जुड़े सभी मामलों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अखिलेश का कहना है कि अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा होगा।
सदन में घेरने की चेतावनी
अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि इस मुद्दे को विधानसभा और संसद दोनों जगह उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि “धांधली, वोट कटने और कानून-व्यवस्था” जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना ही होगा। सपा प्रमुख के अनुसार, अगर सरकार और प्रशासन ने इस पर चुप्पी साधी, तो जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी।
राजनीतिक माहौल और आगे की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह हमला ऐसे समय में आया है, जब चुनावी सरगर्मियां तेज हो रही हैं। वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में राजनीति को और गर्मा सकते हैं। वहीं, भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
कुल मिलाकर, “कोडिंग कांड” को लेकर अखिलेश यादव के आरोप ने चुनावी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यह मामला सिर्फ सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से भी जुड़ा है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं और क्या इससे जनता का भरोसा और मजबूत होता है या राजनीतिक टकराव और तेज होता है।



