अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी से की बैठक, पश्चिम बंगाल चुनाव में दी समर्थन की पेशकश, BJP पर साधा कटाक्ष
नई दिल्ली: 27 जनवरी 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें उन्होंने भाजपा (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए ममता बनर्जी के पक्ष में स्पष्ट समर्थन जताया। इस बैठक को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी एकता की बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) और ED से जुड़ी गतिरोधपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियों ने पश्चिम बंगाल और केंद्र के बीच जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। इस पृष्ठभूमि में अखिलेश-ममता की बैठक ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं कि विपक्षी पार्टियाँ आगामी चुनावों में भाजपा के खिलाफ एक साझा मंच पर काम कर सकती हैं।

बैठक का मुख्य एजेंडा: लोकतंत्र, चुनाव और भाजपा की राजनीति
बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को “लोकतंत्र की रक्षा” के प्रति समर्पित बताया और कहा कि भाजपा द्वारा राज्य में राजनीतिक दबाव डालने की कोशिशें लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि हाल ही में ED की कार्रवाइयाँ विपक्षी दलों और उनके सहयोगियों को परेशान करने का एक प्रयास मात्र हैं।
अखिलेश ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने “ED को हराया है और अब वह BJP को हराएंगी” — यह बयान राजनीतिक मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का विषय बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि SP-TMC का गठबंधन या सहयोग भाजपा को न केवल पश्चिम बंगाल में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कड़ी टक्कर दे सकता है।
SIR विवाद: राजनीतिक चर्चा का केंद्र
पिछले कुछ दिनों से स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़ है। SIR एक व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य अवैध मतदाताओं को हटाना बताया जाता है। भाजपा ने इस प्रक्रिया को देश भर में समर्थन दिया है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस कदम का विरोध चल रहा है, जिसमें TMC ने इसे राजनीतिक साज़िश बताया है।
BJP का दावा है कि SIR के विरोध से यह स्पष्ट हो गया कि TMC अवैध प्रवासियों को बचाने की कोशिश कर रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश है।
संबित पात्रा का आरोप: “रोहिंग्या एवं बांग्लादेशियों की रक्षा”
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने ममता बनर्जी पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ममता सरकार रोहिंग्या और बांग्लादेशी गैरकानूनी निवासियों की रक्षा कर रही है।
पात्रा का कहना है कि SIR प्रक्रिया को रोकने के प्रयास से स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारी धमकियों और हिंसा का सामना कर रहे हैं, और इस तरह की परिस्थिति लोकतंत्र तथा कानून-व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
पात्रा ने इस विवाद में BDO कार्यालय पर कथित हमले और एक TMC विधायक की मौजूदगी का हवाला भी दिया है, और दावा किया कि राज्य में BLO (Booth Level Officer) को धमकाया गया, जिससे एक अधिकारी ने आत्महत्या कर ली।
राजनीतिक विवाद: आरोप और प्रतिक्रियाएँ
संबित पात्रा के आरोपों ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। भाजपा नेताओं ने repeatedly कहा है कि “TMC की राजनीति धार्मिक और जातीय विभाजन को बढ़ावा दे रही है”, और उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में “अवैध प्रवासियों को बचाने” का प्रयास चल रहा है।
वहीं, TMC और विपक्षी दलों का कहना है कि यह एक राजनीतिक विमर्श है और भाजपा को राजनीतिक आधार पर SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा करना है। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल में वोट बैंक की राजनीति बताया है और SIR के विरोध को लोकतंत्र के अधिकारों के लिए लड़ाई कहा है।
ममता बनर्जी की स्थिति और प्रतिक्रिया
ममता बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। उनका कहना है कि SIR प्रक्रिया को रोकने के प्रयास का मकसद मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि अवैध प्रवासियों का समर्थन करना।
वह बार-बार कह चुकी हैं कि जो भी मतदाता सूची में है, वह भारतीय नागरिक है, और किसी भी वर्ग या समुदाय के खिलाफ भेदभाव नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ SIR से जुड़े मुद्दों पर विचार किए जाने की खबरें भी आ रही हैं, जिससे राजनीतिक और कानूनी लड़ाई और गहरी हो सकती है।
राजनीतिक रणनीति और विपक्ष की एकता
इस बैठक को विपक्षी एकता के प्रयासों का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के बीच राजनीतिक समझौता बताता है कि विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ गठबंधन या सहयोग की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में SIR, अवैध प्रवास, ED की कार्रवाइयाँ, और लोकतंत्र-सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे। भाजपा इन मुद्दों का उपयोग करके TMC और अन्य विपक्षी दलों पर राजनीतिक दबाव बढ़ा रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष के रूप में पेश कर रहा है।
लड़ाई और जनता का दृष्टिकोण
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा और विपक्ष के बीच एक तीव्र राजनीतिक जंग की ओर बढ़ रहे हैं। SIR विवाद, अवैध प्रवासी मुद्दा, और ED से जुड़ी कार्रवाइयाँ चुनावी एजेंडे को प्रभावित कर रही हैं। विपक्षी नेताओं जैसे अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के बीच बढ़ता सहयोग यह संकेत देता है कि भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत हो सकता है।
वहीँ BJP सांसदों द्वारा लगाए गए आरोपों से राजनीतिक बहस और गर्म हो रही है। इन सब घटनाक्रमों का सीधा असर मतदाताओं के मनोबल और आगामी चुनावों के परिणामों पर पड़ेगा।


