पीएम मोदी पर टिप्पणी मामले में भोजपुरी सिंगर नेहा सिंह राठौर को पुलिस नोटिस

पीएम मोदी पर टिप्पणी मामले में भोजपुरी सिंगर नेहा सिंह राठौर को पुलिस नोटिस

वाराणसी:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को वाराणसी पुलिस ने कानूनी नोटिस जारी किया है। यह नोटिस वर्ष 2025 में दर्ज मुकदमे के संबंध में चार्जशीट प्रक्रिया के तहत भेजा गया है। लंका थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है।

पीएम मोदी पर टिप्पणी मामले में भोजपुरी सिंगर नेहा सिंह राठौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में लंका थाना पुलिस ने वर्ष 2025 में दर्ज एक मामले के सिलसिले में उन्हें कानूनी नोटिस जारी किया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को इस कार्रवाई की पुष्टि की।

लंका थाना प्रभारी निरीक्षक राजकुमार शर्मा के अनुसार, नेहा सिंह राठौर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। इसी आधार पर उनके विरुद्ध वर्ष 2025 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था। अब मामले में चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया के तहत उन्हें औपचारिक नोटिस भेजा गया है, ताकि वे जांच और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।

नेहा सिंह राठौर इससे पहले भी अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में रही हैं। उनके विचार अक्सर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े होते हैं, जिस कारण कई बार उन्हें समर्थन मिलता है तो कई बार कड़ा विरोध भी झेलना पड़ता है। बीते साल प्रधानमंत्री मोदी पर की गई टिप्पणी के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया था और राजनीतिक गलियारों में भी इस पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। नोटिस का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी पक्ष कानूनी प्रक्रिया में उपस्थित रहे और अपना पक्ष रख सके। यदि आवश्यक हुआ तो आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

वहीं, नेहा सिंह राठौर के समर्थकों का कहना है कि उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत अपने विचार रखने का हक है। दूसरी ओर, विरोध करने वालों का मानना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना गलत है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में अदालत की प्रक्रिया के साथ इस पर और भी अपडेट सामने आ सकते हैं। राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोग इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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