Zelensky Putin Gaza Peace Board: ज़ेलेंस्की ने पुतिन संग काम करने पर जताई आपत्ति

Zelensky Putin Gaza Peace Board discussion world leaders
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Zelensky Putin Gaza Peace Board को लेकर वैश्विक राजनीति में चर्चा तेज

Zelensky Putin Gaza Peace Board: संयुक्त राष्ट्र की एक रूढ़ वैश्विक शांति पहल से हटकर, यूएस के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक विवादित अंतरराष्ट्रीय शांति परिषद “Board of Peace” (शांति बोर्ड) की घोषणा की है, जिसे गाज़ा संघर्ष के बाद स्थायी वैश्विक शांति के लिए एक मंच बताया जा रहा है। हालांकि यह पहल मध्य पूर्व पर केंद्रित है, इसका दायरा इसके बाहर विस्तृत करने की कोशिशें भी की जा रही हैं, जिससे अशांत क्षेत्रों जैसे यूक्रेन की भूमिका पर प्रश्न उठ रहे हैं।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट कर दिया है कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक ही शांति परिषद में काम करने की कल्पना भी नहीं कर सकते। इस प्रतिक्रिया ने वैश्विक राजनीति और रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान की दिशा को फिर से उभार दिया है।


डोनाल्ड ट्रम्प के ‘Board of Peace’ प्रस्ताव का परिचय

डोनाल्ड ट्रम्प ने US-प्रायोजित “Board of Peace” की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य 2023–25 के बीच फैले गाज़ा संघर्ष के रणोत्तर पुनर्निर्माण और स्थायी शांति प्रक्रियाओं को लागू करना है। यह बोर्ड मूल रूप से इज़राइल-हमास युद्ध के बाद गाज़ा में शांति स्थापना के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसे वैश्विक संघर्ष समाधान का एक नया मंच बताया जा रहा है।

बोर्ड के प्रारंभिक विवरण में यह कहा गया कि इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समर्थन के साथ स्थापित किया गया है, लेकिन इसके सदस्य चुनने और उसके अधिकार की स्पष्ट रूपरेखा अभी भी संविग्ध बनी हुई है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि इस बोर्ड का नेतृत्व स्वयं करेंगे, और इसमें शामिल होने वाले देशों के नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा। इस परिषद में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए देशों को एक बिलियन डॉलर का योगदान भी करना होगा, जो इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विवादास्पद “पेम-टू-प्ले” (pay-to-play) मॉडल की तरह दिखाता है।

केवल यही नहीं, इस बोर्ड में इज़राइल, भारत, चीन, रूस और कई अन्य देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है, जिससे एक संभावित वैश्विक नेतृत्व मंच के रूप में इसे प्रतिष्ठित किया जा रहा है।


ज़ेलेंस्की का रूसी समकक्ष के साथ सहयोग पर स्पष्ट इनकार

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने प्रेस से कहा कि ट्रम्प की इस शांति परिषद की प्रस्तावना महत्वपूर्ण हो सकती है, पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक ही मंच पर काम करने की कल्पना “बहुत कठिन” है।

ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच चार वर्षों से चल रहे युद्ध के कारण, दोनों राष्ट्रों के बीच सहयोग स्थापित करना बेहद मुश्किल है और ऐसे किसी मंच पर बैठना जहां रूस की भागीदारी हो, वो उनके लिए स्वीकार्य नहीं है।

यह प्रतिक्रिया यूक्रेन-रूस संघर्ष के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पुतिन के नेतृत्व में रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आधिकारिक रूप से आक्रमण शुरू किया था, जिससे हजारों नागरिक और सैनिक अपनी जान गंवा बैठे हैं और लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।

ज़ेलेंस्की की यह टिप्पणी उस समय आई जब अमेरिका ने यूक्रेन की शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिशों के तहत ट्रम्प-ज़ेलेंस्की वार्ता भी आयोजित की थी, जिसमें 20-बिंदुओं वाला शांति प्रस्ताव उभर कर आया था।


आलोचनाएँ, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भूमिका

फ्रांस और अन्य साझेदारों की प्रतिक्रिया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बोर्ड में शामिल होने में रुचि नहीं रखते हैं, खासकर उस प्रकार की संरचना के लिए जिसमें परंपरागत अंतरराष्ट्रीय ढांचे और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर प्रश्न उठते हैं

कनाडा ने भी $1 अरब डॉलर के शुल्क देने के प्रस्ताव पर अपनी असहमति व्यक्त की है, जबकि यूरोपीय संघ का कहना है कि बोर्ड के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर काम होना चाहिए।


अंतरराष्ट्रीय संगठनों की दृष्टि

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाज़ा संघर्ष के बाद UNSC Resolution 2803 को अनुमोदित किया था, जिसमें बोर्ड को एक औपचारिक पृष्ठभूमि प्रदान की गई थी, लेकिन उसके अधिकार और संरचना स्पष्ट नहीं थे। इस प्रस्ताव को कुछ देशों ने उत्साहपूर्वक समर्थन किया, वहीं कुछ ने अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवीय सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ऐंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक शांति के प्रयासों में कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार न्यायसंगत समाधान की आवश्यकता है, जो सिर्फ एक देश की पहल पर आधारित शांति परिषद से पूरा नहीं हो सकता।


रूस-यूक्रेन संघर्ष: बोर्ड की भूमिका पर विवाद

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए पूर्व में ट्रम्प प्रशासन के तहत बातचीत हुई थी, जिसमें अमेरिका की मध्यस्थता शामिल थी। अंतरिम समझौते पर चर्चा हो चुकी है और ट्रम्प ने कहा था कि रूस शांति के लिए अधिक तैयार दिखता है, हालांकि ज़ेलेंस्की ने इस दावे का खंडन किया था।

खास यह कि यूक्रेन का मानना है कि शांति वार्ता बिना रूस से वास्तविक प्रतिबद्धता प्राप्त किए सफल नहीं होगी। ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन संयम से शांति चाहता है लेकिन यह शांति उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर समझौता किए बिना ही संभव हो सकती है।


क्या Board of Peace वास्तव में शांति का समाधान है?

डोनाल्ड ट्रम्प के “Board of Peace” प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय दबदबे और प्रोत्साहन की दृष्टि से देखा जा रहा है, लेकिन इसके स्वरूप पर कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं:

1. संयुक्त राष्ट्र का वैकल्पिक ढांचा?
कुछ आलोचकों का मानना है कि यह परिषद संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय शांति प्रयासों का विकल्प नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय राजनीति-आधारित मंच बन सकता है, जो विवादास्पद निर्णयों का कारण बन सकता है।

2. भुगतान आधारित सदस्यता का प्रश्न:
एक अरब डॉलर शुल्क की मांग ने कई देशों को चिंतित कर दिया है कि यह धन आधारित वैश्विक नेतृत्व की नई परिकल्पना हो सकती है, जो छोटे देशों और संघर्षग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यावहारिक नहीं है।

3. भू-राजनीतिक संतुलन पर असर:
रूस, चीन, भारत और अन्य महत्वपूर्ण देशों को आमंत्रित करने का उद्देश्य वैश्विक हस्तक्षेप का संतुलन बनाना बताया गया है, लेकिन ज़ेलेंस्की की प्रतिक्रिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते यह संतुलन प्रत्यक्ष परिक्षण का विषय है।


विश्लेषण: शांति प्रयासों की दिशा

Board of Peace के गठन के पीछे ट्रम्प प्रशासन का लक्ष्य है कि वह गाज़ा संघर्ष के बाद स्थिरता प्रदान करे, फिर इसे दुनिया भर के संघर्ष क्षेत्रों के समाधान के लिए विस्तारित पहल के रूप में स्थापित करे। हालांकि इसका प्रभाव अभी प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन यह स्पष्ट है कि:

• यह परिषद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और संघर्ष के समाधान के लिए एक मंच के रूप में आगे आएगी
• इसमें शामिल सदस्य देशों की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया अभी निश्चित नहीं है।
• ज़ेलेंस्की जैसी प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि विश्व स्तर पर राजनीतिक मतभेदों और प्रतिस्पर्धाओं को पार करना चुनौतीपूर्ण होगा।

डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित “Board of Peace” महत्वाकांक्षी वैश्विक शांति ढांचे को नई दिशा देने का प्रयास है, लेकिन यह विवादित विचारों, अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं और व्यावहारिक समस्याओं से घिरा हुआ है। वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की जैसे नेताओं की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि रूस-यूक्रेन जैसे गहन संघर्षों में साझेदारी आधारित शांति परिषद की वास्तविकता अभी दूर की कौड़ी है

अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब यह देख रहा है कि क्या यह बोर्ड सार्वभौमिक शांति और कॉमन गोल को प्राप्त करने में सक्षम होगा, या फिर यह केवल राजनीतिक मंचों में एक और बहस का विषय बनकर रह जाएगा।


कॉल ऑफ स्टफ (Key Facts / Bullets)

• डोनाल्ड ट्रम्प ने “Board of Peace” नामक शांति परिषद की घोषणा की है।
• इसका मूल लक्ष्य गाज़ा संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण और शांति सुनिश्चित करना है।
• इस बोर्ड में रूस, चीन, भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया गया है।
• एक अरब डॉलर का सदस्य शुल्क विवाद का कारण बना है।
• वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ साझा रूप से परिषद में काम करना मुश्किल है।
• फ्रांस और कनाडा समेत कई देशों ने बोर्ड में शामिल होने की शर्तें स्पष्ट नहीं होने पर संदेह व्यक्त किया है।
• परिषद का विस्तार अन्य संघर्ष क्षेत्रों तक करने पर भी विचार किया जा रहा है।

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