उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड: आरोपियों की स्वीकारोक्ति के बाद खोजी गई न्याय की राह, देहरादून में उभरा जनाक्रोश
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा-भोगपुर स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या का मामला न केवल राज्य, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रहा है। आरोप है कि रिसॉर्ट के मालिक और प्रबंधन से जुड़े तीन लोगों ने पहले अंकिता के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया और उसके विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध ने समाज के विभिन्न वर्गों को झकझोर कर रख दिया और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था तथा सत्ता-संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अंकिता भंडारी, मूल रूप से दोभ-श्रीकोट, पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली थीं। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने देहरादून से होटल प्रबंधन में छह माह का डिप्लोमा किया और 28 अगस्त 2022 को वनंतरा रिज़ॉर्ट, ऋषिकेश में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम शुरू किया। बताया जाता है कि नौकरी ज्वॉइन करने के कुछ ही समय बाद उन्हें कार्यस्थल पर अनुचित दबाव और अवांछित प्रस्तावों का सामना करना पड़ा, जिसका उन्होंने विरोध किया। इसी विरोध ने अंततः उनकी जान ले ली।
इस मामले में प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य, जो रिज़ॉर्ट का मालिक है, उसके साथ अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को भी गिरफ्तार किया गया। यह भी सामने आया कि पुलकित आर्य एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से जुड़ा है, जिसके कारण शुरुआत में निष्पक्ष जांच को लेकर प्रश्न उठने लगे। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया है और वर्तमान में उन पर अपहरण और हत्या के आरोपों में मुकदमा चल रहा है। हालांकि, पुलिस आरोपपत्र में अब तक राजनीतिक संरक्षण या किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सीधी संलिप्तता का उल्लेख नहीं किया गया है।
अंकिता की मां और परिवारजन लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि मामले में प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण जांच में देरी हुई और कई महत्वपूर्ण तथ्य दबाए गए। यही कारण है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना न रहकर सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया। राष्ट्रीय मीडिया, महिला संगठनों तथा सोशल मीडिया अभियानों ने इसे देशव्यापी चर्चा का विषय बना दिया।
इसी क्रम में देहरादून में आज आयोजित विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर इस मामले को राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में ला दिया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और सामान्य नागरिक शामिल हुए। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि हरिद्वार से भाजपा की एक मंडल अध्यक्ष भी इस विरोध में शामिल हुईं। उन्होंने खुले मंच से पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जताते हुए कहा,
“थू ऐसी गंदी भाजपा को, जिसने आज हमें रुला दिया। अरे धामी, गट्टू को लेकर आ। सर्विस हम देंगे उसे।”
उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि यह मामला पार्टी या विचारधारा से परे जाकर जनभावनाओं से जुड़ चुका है। राज्य सरकार पर लगातार विपक्ष और सामाजिक संगठनों का दबाव बना हुआ है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में कोई समझौता न किया जाए। विरोध प्रदर्शनों में यह मांग भी प्रमुखता से उठी कि मामले की जांच उच्चस्तरीय और पूर्णतः स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक दखलअंदाजी की संभावना समाप्त हो।
उत्तराखंड सरकार ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, जिस तरह रिज़ॉर्ट को बुलडोज़र से तोड़ा गया, उस पर भी कई कानूनी सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया से बाहर जाकर केवल जनभावनाओं को शांत करने का प्रयास था, जबकि समर्थकों ने इसे अपराध के प्रतीकात्मक अंत के रूप में देखा।
अंकिता भंडारी हत्या कांड ने राज्य के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने वाली महिला कर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। परिवार जनों का कहना है कि अंकिता ने नौकरी के दौरान दबाव और उत्पीड़न के संकेत दिए थे, लेकिन समय रहते यह शिकायतें संज्ञान में नहीं ली गईं। यह स्थिति कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न संबंधी कानूनों के वास्तविक क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब अपराध के केंद्र में प्रभावशाली और धनिक वर्ग के लोग होते हैं, तब न्यायिक और प्रशासनिक संरचना पर लोगों का भरोसा स्वतः ही कसौटी पर आ जाता है। यही कारण है कि आज भी सड़कों पर उतरकर लोग पारदर्शी और तेजतर्रार न्यायिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
अंततः, यह मामला केवल एक युवा महिला की दर्दनाक मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज और व्यवस्था के लिए एक कसौटी बन चुका है। यह केस बताता है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं या नहीं, और क्या हमारा तंत्र पीड़ितों को समय रहते सुरक्षा और न्याय दिलाने में सक्षम है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और सरकार की प्रतिबद्धता यह तय करेगी कि अंकिता भंडारी को असली न्याय मिल पाएगा या नहीं। फिलहाल, देहरादून से लेकर हरिद्वार और पूरे उत्तराखंड में जनता की निगाहें इस मामले पर टिकी हुई हैं।



