US के हमलों से लेकर Tether के गोल्ड निवेश तक: सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी ला सकते हैं ये 5 बड़े फैक्टर
सोने की कीमतों ने 2025 में करीब 70% की तेज़ उछाल के साथ 1979 के बाद अपनी सबसे मजबूत सालाना बढ़त दर्ज की है। अब सप्ताहांत में हुए अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में जोखिम बढ़ गया है, जिसके चलते सोमवार को ट्रेडिंग शुरू होते ही गोल्ड फिर सुर्खियों में आ सकता है। भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और डिजिटल एसेट सेक्टर से बढ़ती दिलचस्पी मिलकर सोने के लिए एक मजबूत सपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
आइए समझते हैं वे 5 प्रमुख कारक, जो सोमवार को सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं:
वेनेज़ुएला पर US स्ट्राइक से बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता
अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला में कथित सैन्य कार्रवाई के बाद लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इतिहास गवाह है कि जब भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से निकलकर गोल्ड जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यदि हालात और बिगड़ते हैं या तेल बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ती है, तो गोल्ड के लिए शॉर्ट-टर्म में मजबूत सपोर्ट बन सकता है।

केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार गोल्ड खरीद
दुनियाभर के सेंट्रल बैंक हाल के वर्षों में लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। डॉलर पर निर्भरता घटाने और सुरक्षित वैल्यू स्टोर के रूप में गोल्ड को प्राथमिकता देने की यह रणनीति 2024 और 2025 में और तेज हुई है। इससे गोल्ड की कीमतों को एक स्थायी आधार मिलता है और किसी भी करेक्शन की गहराई कम होती है।
क्रिप्टो कंपनी Tether का गोल्ड में निवेश
स्टेबलकॉइन जारीकर्ता Tether द्वारा गोल्ड-बैक्ड रिजर्व्स बढ़ाने के संकेत मिले हैं। इससे डिजिटल एसेट्स और गोल्ड मार्केट के बीच एक नया निवेश पुल बन रहा है। क्रिप्टो मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच गोल्ड एक सुरक्षित हेज के तौर पर उभर रहा है, जो इसकी मांग को और बढ़ा सकता है।
फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और ब्याज दरों की संभावना
सोने का प्रदर्शन हमेशा ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती से जुड़ा रहा है। बाजार में यह उम्मीद बनी हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में दरों में कटौती कर सकता है। लोअर इंटरेस्ट रेट का मतलब है गोल्ड रखने की लागत घटना, जो निवेशकों को बुलियन की ओर आकर्षित करता है।
ETF इनफ्लो और रिटेल डिमांड में सुधार
गोल्ड-आधारित ETF में फिर से इनफ्लो बढ़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि संस्थागत निवेशक गोल्ड पर भरोसा बनाए हुए हैं। साथ ही भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में आभूषण और बार-कोइन की डिमांड भी मजबूत बनी हुई है, जबकि कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं।
आउटलुक
कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को बाजार में वोलैटिलिटी रह सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और संभावित डोविश मोनेटरी पॉलिसी गोल्ड को सपोर्ट दे सकती है। यदि जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और तेजी से बढ़ती है, तो सोने की कीमतों में एक और अपसाइड मूव देखने को मिल सकता है।



