• मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल संकट के बाद इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को उनके पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में हुई है।
इंदौर पानी कांड: नगर निगम आयुक्त हटाए गए, दो वरिष्ठ अधिकारी निलंबित—सरकार ने दिखाई सख्ती
इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति से लोगों के बीमार पड़ने और मौतों के मामलों के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को उनके पद से हटा दिया है। इसके साथ ही नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह मामला दिसंबर के अंतिम सप्ताह में सामने आया, जब इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में रह रहे लोगों ने पेट दर्द, उल्टी-दस्त और तेज बुखार जैसी शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं। बाद में जांच में सामने आया कि इन इलाकों में सप्लाई होने वाला पेयजल दूषित हो गया था। अनेक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई गई। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कुछ मौतें भी हुईं, हालांकि आधिकारिक आंकड़ों की अंतिम पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद की जाएगी।

“त्रासदी के बाद गम में डूबी महिला, आंखों से छलकते दर्द ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।”

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और अधिकारियों से जवाब-तलब किया। इसके बाद ही यह निर्णय लिया गया कि नगर निगम आयुक्त को उनके पद से हटाया जाए और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के निलंबन की कार्रवाई की जाए। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि व्यवस्था में बैठे अधिकारी जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर यदि जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो सख्त कदम अनिवार्य होंगे।
सरकार ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा पानी की लगातार जांच की व्यवस्था की जाए। साथ ही अस्पतालों में उपचार व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है ताकि किसी भी मरीज को इलाज में दिक्कत न हो। स्वास्थ्य अमला लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और मरीजों की स्थिति की मॉनिटरिंग की जा रही है।
इस बीच, इस पूरे प्रकरण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी नाराजगी देखी गई। विभिन्न संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई और समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए। प्रशासन का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इंदौर लंबे समय से स्वच्छता और शहरी प्रबंधन के लिए देशभर में उदाहरण माना जाता रहा है। ऐसे में यह घटना न केवल शहर की छवि पर असर डालती है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद पूरी सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।



