सौरव गांगुली ने साहा पर ठोका 50 करोड़ का मानहानि का मुकदमा, मेसी के इवेंट से क्या है कनेक्शन

सौरव गांगुली (फाइल फोटो) और मेसी के कथित ‘जीओएटी इंडिया टूर’ से जुड़ा प्रचार सामग्री, जिसको लेकर विवाद खड़ा हुआ।

सौरव गांगुली (फाइल फोटो) और मेसी के कथित ‘जीओएटी इंडिया टूर’ से जुड़ा प्रचार सामग्री, जिसको लेकर विवाद खड़ा हुआ।
सौरव गांगुली (फाइल फोटो) और मेसी के कथित ‘जीओएटी इंडिया टूर’ से जुड़ा प्रचार सामग्री, जिसको लेकर विवाद खड़ा हुआ।

सौरव गांगुली ने साहा पर ठोका 50 करोड़ का मानहानि का मुकदमा, मेसी के इवेंट से क्या है कनेक्शन?


कोलकाता :
भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कारोबारी शाहाजी (साहा) साहा के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मामला फुटबॉल के दिग्गज लियोनेल मेसी के कथित ‘जीओएटी इंडिया टूर’ से जुड़े आयोजनों और उससे संबंधित बयानों से जुड़ा है। साहा ने एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू में गांगुली पर इस इवेंट का “मुख्य आयोजक” होने का आरोप लगाया था, जिसे गांगुली ने पूरी तरह से झूठा, आधारहीन और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, लियोनेल मेसी के भारत आगमन को लेकर पिछले कुछ समय से ‘जीओएटी इंडिया टूर’ नामक एक इवेंट चर्चा में रहा। इसी इवेंट के मुख्य आयोजक बताए जा रहे सतद्रु दत्ता की हाल ही में गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तारी के बाद साहा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि सतद्रु दत्ता केवल एक “मोहरा” है और इस पूरे आयोजन के पीछे असली भूमिका सौरव गांगुली की है। साहा के इसी बयान को गांगुली ने मानहानिकारक करार दिया है।

गांगुली का कहना है कि उनका इस इवेंट के आयोजन, फंडिंग या प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं है और जानबूझकर उनका नाम जोड़कर उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।

गांगुली की कानूनी दलील

गांगुली की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि साहा के बयान न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी हैं। याचिका के मुताबिक, एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी और प्रशासक होने के नाते गांगुली की साख पर ऐसे आरोपों का सीधा असर पड़ता है।
कानूनी दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि साहा ने बिना किसी प्रमाण के गंभीर आरोप लगाए, जिन्हें मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित किया गया। इससे गांगुली की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है।

साहा के आरोप क्या थे

साहा ने अपने इंटरव्यू में दावा किया था कि मेसी के भारत दौरे से जुड़े आयोजनों में कई परतें हैं और सतद्रु दत्ता केवल सामने का चेहरा है। उन्होंने यह भी कहा था कि गांगुली इस पूरे प्रोजेक्ट के “मुख्य आयोजक” थे और पर्दे के पीछे से सारी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे। हालांकि, साहा ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया।

मेसी इवेंट विवाद क्यों अहम

लियोनेल मेसी जैसे वैश्विक फुटबॉल स्टार का भारत आना न केवल खेल प्रेमियों के लिए बड़ा आकर्षण है, बल्कि इससे जुड़े आयोजनों में भारी आर्थिक लेनदेन भी होता है। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता, धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुति का मामला सामने आना स्वाभाविक रूप से सुर्खियों में आ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का नाम जुड़ा हो, तो आयोजन से जुड़े हर व्यक्ति की जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ जाती है। इसी कारण इस विवाद ने खेल और कॉरपोरेट जगत, दोनों का ध्यान खींचा है।

खेल जगत की प्रतिक्रिया

इस मामले पर फिलहाल सौरव गांगुली की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह अपनी छवि को लेकर किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं।
खेल जगत के कई जानकारों का मानना है कि गांगुली जैसे कद के व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगाना गंभीर विषय है और यदि आरोप गलत साबित होते हैं, तो कानूनी कार्रवाई स्वाभाविक है।

आगे क्या

अब सबकी नजर अदालत की कार्यवाही पर टिकी है। अदालत यह तय करेगी कि साहा के बयान मानहानि की श्रेणी में आते हैं या नहीं और क्या गांगुली को हर्जाने का हक बनता है।
यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का कानूनी विवाद नहीं, बल्कि इस बात की मिसाल भी बन सकता है कि सार्वजनिक जीवन में बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों के क्या परिणाम हो सकते हैं।मेसी के कथित ‘जीओएटी इंडिया टूर’ से जुड़ा यह विवाद अब खेल से आगे बढ़कर कानूनी और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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