संसद भवन में ‘जी राम जी’ विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद—लोकसभा में हंगामे के बीच विधेयक पारित किया गया।

नई दिल्ली।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाने वाले बहुचर्चित ‘जी राम जी’ (GRAM-G) विधेयक को गुरुवार को संसद से पारित कर दिया गया। लोकसभा में जहां विपक्ष के तीखे विरोध, नारेबाजी और वॉकआउट के बावजूद विधेयक दोपहर बाद पारित हुआ, वहीं राज्यसभा में इस पर बहस आधी रात के बाद तक चली। अंततः रात करीब 12.15 बजे मतदान शुरू हुआ और विधेयक को उच्च सदन की मंजूरी भी मिल गई।
इस विधेयक के पारित होने के साथ ही केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़ी अपनी नई नीति को कानूनी रूप दे दिया है। सरकार का दावा है कि ‘जी राम जी’ विधेयक ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल आधारित रोजगार, स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण और डिजिटल निगरानी व्यवस्था के माध्यम से रोजगार सृजन को अधिक प्रभावी बनाएगा। वहीं विपक्ष इसे मनरेगा को कमजोर करने और गरीबों के काम के अधिकार पर सीधा हमला बता रहा है।
लोकसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
गुरुवार दोपहर जैसे ही ग्रामीण विकास मंत्री ने विधेयक को चर्चा के लिए पेश किया, विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार बिना व्यापक चर्चा और संसदीय समिति की समीक्षा के इस अहम कानून को जल्दबाजी में पारित करा रही है।
कांग्रेस, वाम दलों और कुछ क्षेत्रीय दलों के सांसदों ने इसे “ग्रामीण भारत के लिए विनाशकारी” करार देते हुए सदन से वॉकआउट किया। हंगामे के बीच सत्ता पक्ष ने बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।
राज्यसभा में आधी रात तक चली बहस
राज्यसभा में ‘जी राम जी’ विधेयक पर चर्चा अपेक्षाकृत लंबी रही। सत्ता पक्ष ने जहां इसे मनरेगा से “एक कदम आगे” बताया, वहीं विपक्ष ने देर रात तक सरकार को घेरने की कोशिश की।
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून था, जिसने ग्रामीण गरीबों को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया। नए विधेयक में रोजगार की गारंटी को कमजोर किया गया है और इसे परियोजना-आधारित बना दिया गया है।
लगभग आधी रात के बाद, यानी रात 12.15 बजे, मतदान शुरू हुआ और बहुमत के आधार पर विधेयक पारित घोषित कर दिया गया।
सरकार का पक्ष: “मनरेगा से ज्यादा प्रभावी”
ग्रामीण विकास मंत्री ने बहस के दौरान कहा कि ‘जी राम जी’ विधेयक का उद्देश्य मनरेगा को खत्म करना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार प्रणाली को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है।
उनके अनुसार, नए कानून में:
- कौशल प्रशिक्षण से जुड़े रोजगार को प्राथमिकता दी जाएगी।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम और भुगतान की निगरानी होगी।
- पंचायतों को ज्यादा वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे।
- स्थायी परिसंपत्तियों जैसे सिंचाई, जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर जोर होगा।
मंत्री ने दावा किया कि इससे ग्रामीण युवाओं को सिर्फ मजदूरी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रोजगार के अवसर मिलेंगे।
विपक्ष का आरोप: “गरीबों के अधिकारों पर हमला”
विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर गंभीर आशंकाएं जताईं। उनका कहना है कि मनरेगा ने ग्रामीण संकट के समय लाखों परिवारों को सहारा दिया, खासकर महामारी और आर्थिक मंदी के दौर में।
विपक्ष का आरोप है कि ‘जी राम जी’ विधेयक में रोजगार की कानूनी गारंटी स्पष्ट नहीं है और यह राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल सकता है। साथ ही, निजी भागीदारी और डिजिटल प्रक्रियाओं से गरीब और अशिक्षित मजदूरों को नुकसान होने की आशंका जताई गई।
सड़क से संसद तक विरोध
संसद के भीतर विरोध के साथ-साथ विपक्षी दलों ने संसद परिसर में रात भर प्रदर्शन भी किया। कई सांसदों ने तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और विधेयक को वापस लेने की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के बाहर भी जोर पकड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
आगे क्या?
विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा और सरकार चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने की तैयारी करेगी।
हालांकि, विपक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस कानून के खिलाफ जन आंदोलन और संभावित कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकता है।
कुल मिलाकर, ‘जी राम जी’ विधेयक का पारित होना भारतीय राजनीति और ग्रामीण नीति के लिहाज से एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। जहां सरकार इसे सुधार और आधुनिकरण की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष के लिए यह गरीबों के अधिकारों की लड़ाई का नया अध्याय बन गया है।



