नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपनी तीन देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा की शुरुआत की। इस दौरे का पहला चरण जॉर्डन से शुरू हुआ है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत की विदेश नीति, विशेष रूप से पश्चिम एशिया और वैश्विक कूटनीति, के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान संबंधित देशों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को लेकर व्यापक बातचीत करेंगे।

जॉर्डन क्यों है इस यात्रा का पहला पड़ाव
जॉर्डन भारत का एक विश्वसनीय और रणनीतिक साझेदार देश है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में जॉर्डन की अहम भूमिका रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
जॉर्डन यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी:
- जॉर्डन के सम्राट और वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात करेंगे
- क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे
- व्यापार, ऊर्जा और निवेश सहयोग को बढ़ाने पर जोर देंगे
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और जॉर्डन के बीच रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और विस्तार देने पर भी बातचीत होगी।
तीन देशों की यात्रा में किन मुद्दों पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की इस तीन देशों की यात्रा के दौरान कई अहम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। इनमें शामिल हैं:
- द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को मजबूत करना
- वैश्विक शांति और सुरक्षा पर सहयोग
- व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी
- भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद
- क्षेत्रीय भू-राजनीतिक हालात
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा भारत की सक्रिय विदेश नीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारत की पश्चिम एशिया नीति को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत की पश्चिम एशिया नीति को नई दिशा देगी। बदलते वैश्विक हालात में भारत अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध और मजबूत कर रहा है।
जॉर्डन जैसे देशों के साथ सहयोग से:
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा
- भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति सशक्त होगी
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राएं लगातार यह संकेत देती हैं कि भारत अब वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। तीन देशों का यह दौरा भी उसी नीति का हिस्सा है, जिसमें भारत साझेदारी, संवाद और सहयोग पर जोर देता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस दौरे से भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई ऊर्जा आएगी और कई दीर्घकालिक समझौतों का मार्ग प्रशस्त होगा।


