इतिहास रचता वक्फ संशोधन अधिनियम 2025: मुस्लिम संपत्तियों के लिए बड़ी राहत!

वक्फ अधिनियम 2025 पर राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी की खबरw

राष्ट्रपति मुर्मू ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को मंजूरी दी। जानिए इस कानून में

वक्फ अधिनियम 2025 पर राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी की खबरw
इतिहास रचता वक्फ संशोधन अधिनियम 2025: मुस्लिम संपत्तियों के लिए बड़ी राहत!

क्या है खास और यह वक्फ संपत्तियों को कैसे सुरक्षित बनाएगा।

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्फ संशोधन अधिनियम, 2025 (Waqf Amendment Act 2025) को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिससे यह विधेयक अब देश में कानून का रूप ले चुका है। सरकार का दावा है कि इस ऐतिहासिक संशोधन से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी, गैरकानूनी कब्जों पर लगाम लगेगी और दशकों पुराने विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

वक्फ क्या होता है?

वक्फ एक इस्लामी कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति—जैसे भूमि, भवन या अन्य संपत्ति—को किसी धार्मिक या परोपकारी कार्य हेतु वक्फ कर देता है। इन संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ बोर्ड करता है। भारत में वक्फ संपत्तियों की संख्या लाखों में है, और इनका कुल मूल्य हजारों करोड़ रुपये में आँका जाता है।

क्या है वक्फ संशोधन अधिनियम 2025?

यह अधिनियम 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करता है। नए संशोधन के तहत सरकार ने कई ऐसे प्रावधान जोड़े हैं जो वक्फ बोर्डों की शक्तियों को सीमित करते हैं, और उन्हें अधिक जवाबदेह बनाते हैं

प्रमुख बदलाव:

  1. विवादित संपत्तियों पर रोक: अब कोई भी संपत्ति, जो कोर्ट में विवादित है, उसे वक्फ संपत्ति के रूप में घोषित नहीं किया जा सकता जब तक कि अदालत से स्पष्ट आदेश न मिले।
  2. सरकारी भूमि पर सख्ती: अब किसी सरकारी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
  3. पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता: संपत्ति को वक्फ के रूप में पंजीकृत करने से पहले उचित जाँच और दस्तावेज़ों की पुष्टि की जाएगी।
  4. रिकॉर्ड डिजिटलीकरण: सभी वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और निगरानी में आसानी हो।

संसद से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मुहर

यह विधेयक पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में पारित किया गया था। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद अब इसे लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार इसे एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, जिससे “जमीन जिहाद” और अवैध वक्फ दावों पर रोक लगाई जा सकेगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

हालांकि सरकार इस कानून को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला बताया है। कई मुस्लिम संगठनों ने भी चिंता जताई है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के संरक्षण को कमजोर कर सकता है।

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि इस कानून से न तो किसी की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और न ही वक्फ व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है—बल्कि उसे पारदर्शी और कानूनी बनाने की कोशिश की जा रही है।

सरकार की मंशा क्या है?

सरकार के अनुसार, देश में लाखों वक्फ संपत्तियाँ ऐसी हैं जिन पर विवाद, अवैध कब्ज़ा, और गैर-कानूनी लीजिंग जैसी समस्याएँ हैं। यह अधिनियम ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, और वक्फ बोर्डों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत करता है।

क्या होगा इसका असर?

  1. विवादों में कमी: अब ऐसी संपत्तियाँ, जिन पर केस चल रहा है, उन्हें वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा।
  2. बिना दस्तावेजों के वक्फ दावा मुश्किल: अब उचित दस्तावेज़ और प्रमाण के बिना कोई भी वक्फ दावा नहीं मान्य होगा।
  3. सरकारी जमीन सुरक्षित: यह संशोधन यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी जमीन को बिना मंजूरी के वक्फ संपत्ति में न बदला जा सके।

भविष्य की राह

सरकार इस अधिनियम को लागू करने के लिए जल्द ही नियमावली जारी करेगी। साथ ही सभी राज्यों के वक्फ बोर्डों को निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे अपने रिकॉर्ड्स की समीक्षा करें और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी अपलोड करें।

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