समाजवादी पार्टी बनाम भाजपा: अखिलेश यादव ने बीजेपी अध्यक्ष चुनाव में देरी पर साधा निशाना, अमित शाह ने दिया करारा जवाब 2025

Amit Shah and Akhilesh Yadav Debate on BJP President Election

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, वह अभी तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर पाई है।”

Amit Shah and Akhilesh Yadav Debate on BJP President Election
बीजेपी अध्यक्ष चुनाव में देरी पर अखिलेश यादव का तंज, अमित शाह का करारा जवाब!

हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने तुरंत अखिलेश यादव के इस तंज का जवाब दिया। उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि “हमारी पार्टी में 12-13 करोड़ सदस्यों में से चुनाव की प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष चुना जाता है, जबकि विपक्षी पार्टियों में सिर्फ 5 परिवार के लोग ही अध्यक्ष चुनते हैं।”

बीजेपी अध्यक्ष चुनाव में देरी क्यों?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 10 महीने से लंबित है, लेकिन यह प्रक्रिया संसद सत्र के बाद जल्द ही शुरू हो सकती है। संभावना है कि भाजपा अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक अपने नए अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है।

जेपी नड्डा, जो जनवरी 2020 में सर्वसम्मति से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे, इस पद पर अमित शाह के बाद आए थे। आमतौर पर भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है, लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए नड्डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था।

अमित शाह का अखिलेश यादव पर पलटवार

अमित शाह ने लोकसभा में विपक्षी नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा, “आपकी पार्टियों में तो राष्ट्रीय अध्यक्ष 5 परिवार के लोग तय करते हैं, लेकिन हमारे यहां 12-13 करोड़ कार्यकर्ताओं में से लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुना जाता है। इसमें समय लगता है।”

शाह ने मजाकिया अंदाज में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, “आपका मामला तो अलग है। मैं कह सकता हूं कि आप अगले 25 साल तक अपनी पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे।” इस पर अखिलेश यादव भी मुस्कुराते नजर आए।

परिवारवाद बनाम लोकतंत्र का मुद्दा

अमित शाह ने विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष चुना जाता है, जबकि कई विपक्षी दलों में अध्यक्ष पद परिवार के सदस्यों तक सीमित रहता है। भाजपा इसे एक प्रमुख मुद्दे के रूप में पेश कर रही है, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों से पहले।

क्या कहती है समाजवादी पार्टी?

समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रही है। एसपी प्रवक्ताओं का कहना है कि “बीजेपी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए परिवारवाद का मुद्दा उठा रही है, जबकि उनके खुद के कई नेता वंशवाद की राजनीति में शामिल हैं।”

भाजपा के नए अध्यक्ष को लेकर क्या संभावनाएं हैं?

भाजपा में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया चेहरा सामने आता है या फिर पार्टी नेतृत्व नड्डा को ही फिर से मौका देने का फैसला करती है।

निष्कर्ष

अखिलेश यादव और अमित शाह के बीच हुई यह तीखी नोकझोंक आगामी चुनावी माहौल को दर्शाती है। भाजपा का अध्यक्ष चुनाव भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना होगी, और इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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