केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने IDBI बैंक की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि ठोस सुधारों से देश का बैंकिंग तंत्र अब पूरी तरह पटरी पर लौट आया है।
संसद में आर्थिक नीतियों और बैंकिंग सुधारों पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि किस प्रकार पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में बैंकिंग सेक्टर भारी दबाव और अनियंत्रित एनपीए (NPA) के संकट में फंसा था। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों और वित्तीय विश्लेषकों की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के पारदर्शी एवं कड़े वित्तीय अनुशासन के चलते आज न केवल आईडीबीआई बैंक, बल्कि पूरा सार्वजनिक बैंकिंग ढांचा ऐतिहासिक मुनाफे की ओर अग्रसर हुआ है।
पूर्ववर्ती दौर के 5 बड़े फैसलों पर उठे सवाल
वित्त मंत्री ने राजनीतिक बयानबाजी को दरकिनार करते हुए तथ्यपरक विश्लेषण पेश किया और पूछा कि आखिर किसके समय में बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य की अनदेखी की गई थी। उन्होंने विशेष रूप से पांच अहम बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया:
- अनियंत्रित ऋण वितरण (फोन बैंकिंग संस्कृति): बिना ठोस गारंटी और वित्तीय पड़ताल के बड़े कॉर्पोरेट घरानों को अंधाधुंध कर्ज बांटने की अनुमति क्यों दी गई?
- एनपीए को छिपाने की कार्यप्रणाली: वास्तविक गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) को बैलेंस शीट में पारदर्शिता से दिखाने के बजाय बार-बार ‘एवरग्रीनिंग’ कर संकट को क्यों टाला गया?
- आईडीबीआई बैंक की अनदेखी: एक प्रमुख विकास वित्त संस्थान (DFI) के रूप में कार्य कर रहे बैंक को बिना किसी ठोस रणनीति के वाणिज्यिक बैंक में बदल कर अधर में क्यों छोड़ा गया?
- सख्त निगरानी व्यवस्था का अभाव: वित्तीय जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने के लिए समय रहते नियामक सुधार और ऑडिट प्रक्रियाएं क्यों लागू नहीं की गईं?
- पुनर्पूंजीकरण (Recapitalization) की स्पष्ट नीति न होना: बैंकों की पूंजी पर्याप्तता को दुरुस्त रखने के लिए कोई दीर्घकालिक ढांचा क्यों नहीं तैयार किया गया?
‘4R’ फॉर्मूले से लौटी देश के बैंकों की मजबूती
वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने बैंकिंग संकट से निपटने के लिए एक सक्रिय और समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाया। Recognition (पहचान), Resolution (समाधान), Recapitalisation (पुनर्पूंजीकरण) और Reforms (सुधार) की नीति के कारण ही आज आईडीबीआई बैंक पीसीए (Prompt Corrective Action) फ्रेमवर्क से बाहर निकलकर मजबूत वित्तीय स्थिति में पहुंच चुका है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी ऑडिटिंग, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के प्रभावी अमल और सशक्त नेतृत्व के चलते आज भारत का बैंकिंग सेक्टर वैश्विक स्तर पर सबसे भरोसेमंद और लचीला बनकर उभरा है, जिससे देश 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
(Image Credit: abplive.com)






