सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा को न्यायिक कार्य से अलग किया, घर में मिली जली हुई नकदी बनी विवाद का कारण

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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि जस्टिस यशवंत वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपा जाए

  • सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 24 मार्च को उनके ट्रांसफर की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी।
  • 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आवास में आग लगी थी, जहां से फायर ब्रिगेड को भारी मात्रा में जली हुई नकदी मिली
  • दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने इस घटना का वीडियो हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा, जिससे मामला गंभीर हो गया।
  • सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 21 मार्च को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की
  • जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी घटना के समय मध्य प्रदेश में यात्रा कर रहे थे, घर पर सिर्फ उनकी बेटी और वृद्ध माँ थीं।
  • उन्होंने 1992 में वकालत शुरू की थी और 2014 में हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए थे।

पूरा मामला विस्तार से:

कैसे शुरू हुआ विवाद?

14 मार्च 2025 की शाम को दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लग गई। फायर ब्रिगेड को जब आग बुझाने के दौरान कुछ जली हुई नकदी मिली, तो यह मामला चर्चाओं में आ गया। खबरों के अनुसार, यह नकदी अनएकाउंटेड (अघोषित) बताई जा रही थी, जिसे लेकर सवाल उठने लगे।

इस घटना की जानकारी दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी, और इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त कार्रवाई

20 और 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक हुई, जिसमें जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में करने का फैसला लिया गया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें कोई भी न्यायिक कार्य नहीं दिया जाएगा

21 मार्च को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई, जो न्यायपालिका की छवि पर उठ रहे सवालों की समीक्षा करेगी।

जस्टिस वर्मा की सफाई

जस्टिस वर्मा ने कहा कि आग लगने के समय वह और उनकी पत्नी दिल्ली में नहीं थे, बल्कि मध्य प्रदेश में यात्रा कर रहे थे। उनके घर पर सिर्फ उनकी बेटी और वृद्ध माँ मौजूद थीं। उन्होंने खुद को किसी भी अनियमितता से अलग बताया है।

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?

  • जन्म: 1969
  • शिक्षा: रीवा यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश से LLB
  • वकालत की शुरुआत: 1992 में
  • प्रमुख पद:
    • इलाहाबाद हाईकोर्ट के विशेष वकील
    • उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता
  • 2014: इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने
  • 2017: स्थायी न्यायाधीश नियुक्त
  • 2021: दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित
  • 2025: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे गए

अगला कदम क्या होगा?

  • जांच समिति की रिपोर्ट: तीन सदस्यीय समिति इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट में पदभार ग्रहण: जस्टिस वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट जॉइन करेंगे, लेकिन फिलहाल कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा
  • न्यायपालिका की छवि पर असर: यह मामला भारतीय न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्य से अलग करने का फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मामला अभी भी जांच के अधीन है, और आने वाले दिनों में इसकी रिपोर्ट सामने आने की संभावना है।

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