
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक़्फ़ (संशोधन) बिल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे रमज़ान के आखिरी जुमे पर काले बिल्ले (ब्लैक आर्मबैंड) पहनकर विरोध दर्ज करें। AIMPLB का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को खतरे में डाल सकता है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस विरोध के तहत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक सहित कई राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। AIMPLB की अगुवाई में पटना में ‘महा धरना’ आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव भी शामिल हुए। AIMPLB की 31 सदस्यीय एक्शन कमेटी ने इस बिल को “विवादास्पद, भेदभावपूर्ण और समुदाय के लिए हानिकारक” बताया और इसके खिलाफ संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष जारी रखने की घोषणा की।
विरोध में शामिल अन्य दल और संगठन
AIMPLB के इस विरोध को कई विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों का समर्थन मिला। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के सांसद पी. संतोश कुमार ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत की धर्मनिरपेक्षता से जुड़ा मामला है। इसी तरह, CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह बिल ध्रुवीकरण (पोलराइज़ेशन) पैदा करने की कोशिश है।
कांग्रेस ने भी इस बिल का विरोध किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर “सदियों पुराने सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचाने” का आरोप लगाया। तमिलनाडु विधानसभा ने भी केंद्र सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है।
पटना, हैदराबाद, मुंबई समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन
पटना में जुमे की नमाज से पहले जामा मस्जिद (पटना रेलवे स्टेशन के पास) और दरियापुर मस्जिद के बाहर काले बिल्ले बांटे गए। इस विरोध में शामिल इमामों और मुस्लिम नेताओं ने कहा कि सरकार को समुदाय की भावनाओं को समझते हुए इस बिल को वापस लेना चाहिए।
हैदराबाद, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, मलेरकोटला (पंजाब) और रांची जैसे बड़े शहरों में भी इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन हुए। AIMPLB प्रवक्ता डॉ. सैयद क़ासिम रसूल इलियास ने कहा कि काले बिल्ले पहनना लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का तरीका है और इससे यह संदेश जाएगा कि मुस्लिम समुदाय इस बिल को पूरी तरह अस्वीकार करता है।
नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बहिष्कार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी इस मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के विरोध का सामना करना पड़ा। बिहार के सात प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने उनकी “दावत-ए-इफ्तार” का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने एक पत्र लिखकर साफ किया कि यह निर्णय नीतीश कुमार की पार्टी द्वारा वक़्फ़ संशोधन बिल के समर्थन के विरोध में लिया गया है।
क्या है वक़्फ़ संशोधन बिल विवाद?
वक़्फ़ अधिनियम में किए जाने वाले संशोधनों को लेकर AIMPLB और मुस्लिम संगठनों को आशंका है कि इससे मुस्लिम समुदाय की वक़्फ़ संपत्तियों पर खतरा मंडराने लगेगा।
संसद की संयुक्त समिति ने इस बिल पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और ऐसी संभावना है कि इसे संसद के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। इस बिल के कई प्रावधानों को लेकर विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने असहमति दर्ज कराई है और विरोध स्वरूप वैकल्पिक रिपोर्ट (डिसेंट नोट) भी पेश की गई है।
AIMPLB ने साफ कर दिया है कि वे सभी संवैधानिक और कानूनी तरीकों से इस बिल के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में हैदराबाद, दिल्ली और लखनऊ में बड़े पैमाने पर रैलियां निकाले जाने की योजना भी बनाई गई है।
आगे क्या होगा?
इस बिल को लेकर केंद्र सरकार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए आगे की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। AIMPLB और विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार इस बिल को वापस नहीं लेती, तो विरोध प्रदर्शन और तेज़ होंगे। वहीं, सरकार इस मुद्दे पर अपने रुख पर अडिग नजर आ रही है।
👉 अब देखना होगा कि संसद में इस बिल पर क्या रुख अपनाया जाता है और AIMPLB की आगामी रणनीति क्या होगी।


