भारत-चीन सीमा सुरक्षा को लेकर विपक्ष की बयानबाजी के बीच भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान एलएसी पर पूरी मुस्तैदी से डटे हुए हैं, जहां देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है।
हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की वर्तमान स्थिति पर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बयान को आधार बनाकर केंद्र सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसे विशुद्ध रूप से राजनीतिक विमर्श के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि जमीनी हकीकत यह है कि देश की सीमाएं पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस हैं।
राजनीतिक बयानबाजी बनाम जमीनी सतर्कता
वॉइस ऑफ मैनपुरी की राष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, आईटीबीपी प्रमुख का वक्तव्य दरअसल फॉरवर्ड पोस्ट्स पर जवानों की लगातार गश्त और उच्च स्तरीय सतर्कता को दर्शाने वाला था। इसके विपरीत, विपक्ष द्वारा इसे सामरिक विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। जानकारों का कहना है कि एलएसी जैसी संवेदनशील सीमाओं पर गश्त और प्रोटोकॉल बेहद गतिशील होते हैं, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां पूरी रणनीति के साथ संभाल रही हैं।
केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचा कमजोर माना जाता था, वहीं आज भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल किसी भी परिस्थिति का तुरंत जवाब देने में सक्षम हैं।
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में केंद्र के ऐतिहासिक कदम
राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने चीन सीमा से सटे इलाकों में विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति दी है, जिनमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: सीमावर्ती गांवों को खाली होने से रोकने और स्थानीय आबादी को सुरक्षा की पहली पंक्ति बनाने के लिए विकास परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन।
- अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक हर मौसम में चालू रहने वाली सुरंगों, पुलों और सामरिक सड़कों का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया।
- निगरानी तंत्र का आधुनिकीकरण: फॉरवर्ड लोकेशंस पर आधुनिक ड्रोन, सेंसर और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के जरिए 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
- सशक्त कूटनीति और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया: किसी भी चीनी दुस्साहस का न केवल सैन्य स्तर पर माकूल जवाब दिया गया, बल्कि राजनयिक वार्ताओं में भी भारत ने हमेशा मजबूत स्थिति बनाए रखी है।
संवाद और सामरिक संतुलन पर जोर
रक्षा जानकारों का स्पष्ट मत है कि सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सुरक्षा बलों के मनोबल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकार सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कोर कमांडर स्तर की वार्ताओं को भी जारी रखे हुए है और साथ ही सामरिक स्तर पर जवानों को खुली छूट और आधुनिक हथियार मुहैया कराए गए हैं। आईटीबीपी और थलसेना का संयुक्त समन्वय यह सुनिश्चित करता है कि देश की एक इंच जमीन पर भी कोई आंच न आ सके।
(Image Credit: abplive.com)






