भरूच जुमा मस्जिद विवाद अब गुजरात हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है। तहखाने में जैन मंदिर के प्राचीन अवशेष होने के दावों के बीच प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
गुजरात के ऐतिहासिक शहर भरूच में स्थित सदियों पुरानी जुमा मस्जिद को लेकर कानूनी और ऐतिहासिक बहस तेज हो गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस संरक्षित स्मारक के तहखाने में प्राचीन जैन मंदिर से जुड़े नक्काशीदार स्तंभ और धार्मिक प्रतीक मौजूद हैं। इस मामले में निष्पक्ष जांच और वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।
अदालत में क्या रखी गई दलीलें?
याचिका में दावा किया गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत आने वाले इस ढांचे की ऐतिहासिक बनावट कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करती है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरातात्विक सत्यता की पड़ताल से भी जुड़ा है।
वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, राज्य प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाए हैं। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि कानून और व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विवाद से जुड़े प्रमुख बिंदु:
- प्राचीन संरचना का दावा: मस्जिद के निचले हिस्से यानी तहखाने में प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और नक्काशीदार खंभे होने का उल्लेख।
- एएसआई का संरक्षण: यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है, जिससे किसी भी छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं है।
- संवैधानिक प्रक्रिया: मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट सभी पक्षों की कानूनी दलीलों पर विचार कर रहा है।
- प्रशासनिक मुस्तैदी: संवेदनशील क्षेत्र में अफवाहों को रोकने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है।
विरासत के संरक्षण और कानून के राज पर जोर
सरकार और स्थानीय प्रशासन इस पूरे प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता और परिपक्वता के साथ संभाल रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सच सामने लाने के प्रयासों का स्वागत किया जा रहा है। अधिकारियों का ध्यान विकास, पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहरों के पारदर्शी संरक्षण पर केंद्रित है, जिससे शहर के विकास और शांति पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
(Image Credit: abplive.com)






