देश में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। आईटी मंत्रालय ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) को डीपफेक, AI कंटेंट और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) पर नकेल कसने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।
डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार की सख्त पहल
केंद्र सरकार का मानना है कि इंटरनेट पर हर नागरिक, विशेषकर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसी प्रतिबद्धता के तहत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Rules) का पूरी तरह से पालन करना होगा। केंद्र ने यह दो टूक कहा है कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की सेंसरशिप नहीं, बल्कि देश के कानून को सर्वोपरि रखने की एक पारदर्शी प्रक्रिया है।
वॉइस ऑफ मैनपुरी के माध्यम से सामने आई इस रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय लगातार टेक कंपनियों को ज्यादा जवाबदेह और जिम्मेदार बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, एआई के दुरुपयोग और अश्लील सामग्री से शत-प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करना है।
केंद्र सरकार द्वारा मेटा को दिए गए मुख्य निर्देश
- CSAM पर ज़ीरो टॉलरेंस: बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े कंटेंट को तुरंत हटाने और इसे फैलाने वाले अकाउंट्स पर त्वरित कानूनी कार्रवाई करने के कड़े निर्देश।
- AI और डीपफेक पर लगाम: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा बनाए गए भ्रामक और डीपफेक कंटेंट की पहचान के लिए वाटरमार्किंग और स्पष्ट लेबलिंग को अनिवार्य बनाना।
- कानूनी अनुपालन: भारत के आईटी नियमों के अनुसार अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करना और शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक मजबूत करना।
- त्वरित कंटेंट रिमूवल: किसी भी अवैध या भड़काऊ सामग्री की सूचना मिलते ही उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर प्लेटफॉर्म से हटाना।
सुरक्षित ‘डिजिटल इंडिया’ की ओर मजबूत कदम
वैश्विक टेक कंपनियों को भारतीय कानून के दायरे में लाकर सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि देश के नागरिकों की डिजिटल गोपनीयता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जहां कुछ तत्व इसे पाबंदी के रूप में पेश करने का प्रयास करते हैं, वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे देश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने वाला एक अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी कदम मान रहे हैं। मोदी सरकार के इस सख्त रुख से देश का डिजिटल स्पेस पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगा।
(Image Credit: abplive.com)






