धर्म डेस्क। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण (सावन) मास का शुभारंभ हो चुका है। इस पूरे महीने शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और विशेष रूप से सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, जलाभिषेक करने और भगवान शिव की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सावन सोमवार का व्रत अविवाहित युवतियों के लिए मनचाहा वर प्राप्त करने तथा विवाहित महिलाओं के लिए सुखी दांपत्य और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। वहीं पुरुष भी परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता की कामना से यह व्रत रखते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार करते हैं। इसलिए इस माह में की गई पूजा, जप, दान और व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है।
सावन सोमवार 2026 की तिथियां
वर्ष 2026 में सावन के चार सोमवार पड़ रहे हैं—
- पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026
- दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026
- तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026
- चौथा सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026
इन चारों सोमवार को देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा।

सावन सोमवार व्रत का महत्व
सनातन धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने इसी काल में किया था। देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है।
धार्मिक विश्वास है कि सावन सोमवार का व्रत करने से—
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।
- आर्थिक परेशानियां कम होती हैं।
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।
- परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि
सावन सोमवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या शिवालय में भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।
पूजा के दौरान शिवलिंग पर—
- गंगाजल
- शुद्ध जल
- दूध
- दही
- शहद
- घी
- शक्कर
- बेलपत्र
- धतूरा
- भांग
- आक के फूल
- चंदन
अर्पित करें।
इसके बाद शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र अथवा “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
शाम के समय प्रदोष काल में पुनः दीप, धूप और नैवेद्य के साथ भगवान शिव की आरती करें।
सावन सोमवार व्रत में क्या करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को निम्न बातों का पालन करना चाहिए—
- ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
- बेलपत्र, भांग, धतूरा और चंदन अर्पित करें।
- दिनभर सात्विक भोजन करें।
- अधिक से अधिक “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान दें।
- क्रोध, अहंकार और कटु वाणी से बचें।
- शाम के समय प्रदोष काल में पुनः पूजा करें।
सावन सोमवार व्रत में क्या नहीं करें
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन कुछ बातों से बचना चाहिए—
1. तुलसी न चढ़ाएं
भगवान शिव को तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
2. हल्दी और केतकी का फूल न चढ़ाएं
शिवलिंग पर हल्दी तथा केतकी के पुष्प अर्पित करना वर्जित माना गया है।
3. टूटा हुआ बेलपत्र न चढ़ाएं
बेलपत्र हमेशा साबुत और स्वच्छ होना चाहिए।
4. दिन में न सोएं
व्रत के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए।
5. तामसिक भोजन न करें
मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक पदार्थों से दूरी रखें।
6. नशे का सेवन न करें
धार्मिक दृष्टि से व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का नशा वर्जित माना गया है।
7. काले वस्त्र पहनने से बचें
इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता।
सावन सोमवार पर कौन से रंग पहनना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन—
- सफेद
- पीला
- हरा
- लाल
- केसरिया
रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। ये रंग सकारात्मक ऊर्जा और मंगल के प्रतीक माने जाते हैं।
उज्जैन का वह शिव मंदिर जो साल में केवल एक दिन खुलता है
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर के बारे में मान्यता है कि उसके कपाट वर्ष में केवल सावन माह के एक विशेष दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं। इस दौरान हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक दृष्टि से इस मंदिर का विशेष महत्व माना जाता है।
सावन माह की पहली एकादशी कब है?
सावन मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी वर्ष 2026 में 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत रखने का विशेष महत्व माना गया है।
शुभ योग
- प्रातःकालीन पूजा का समय विशेष शुभ माना जाएगा।
- ब्रह्ममुहूर्त एवं अभिजीत काल में पूजा करना फलदायी माना जाता है।
- एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाएगा।
(व्रत और पारण का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहेगा।)
शिव मंत्र
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं।
जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम्॥
भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं।
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे॥श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धा, संयम और सात्विक जीवन के साथ किया गया सावन सोमवार का व्रत भक्तों को आध्यात्मिक शांति, सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। यदि व्रत के दौरान धार्मिक नियमों का पालन किया जाए और निषिद्ध कार्यों से बचा जाए तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है।






