जनगणना 2026 के पहले चरण में 33 सवाल पूछे जाएंगे। लिव-इन रिलेशन को भी विवाहित मानने का प्रावधान, स्व-गणना पोर्टल शुरू। जानिए पूरी प्रक्रिया और सवाल।

नई दिल्ली, 30 मार्च 2026-भारत में आगामी जनगणना 2026 को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होने जा रही है, क्योंकि इसमें डिजिटल प्रक्रिया के साथ-साथ सामाजिक बदलावों को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना के पहले चरण में कुल 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे, जो नागरिकों के घर, परिवार, संसाधनों और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे।

सबसे खास बात यह है कि इस बार लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की गई है। अगर कोई जोड़ा सहजीवन (लिव-इन) में रहते हुए एक-दूसरे को स्थायी जीवनसाथी मानता है, तो उन्हें जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह बदलाव समाज में बदलते रिश्तों की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

पहले चरण में क्या होगा: हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना

जनगणना 2026 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जिसे हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO) कहा जाता है। इस चरण में देशभर के घरों की स्थिति और उनमें उपलब्ध सुविधाओं का डेटा इकट्ठा किया जाएगा।

इस दौरान गणनाकर्ता (Enumerator) घर-घर जाकर या ऑनलाइन माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे। सरकार ने इसके लिए स्व-गणना (Self Enumeration) पोर्टल भी शुरू किया है, जहां नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

33 सवालों में क्या-क्या शामिल होगा

पहले चरण में पूछे जाने वाले 33 सवालों का उद्देश्य केवल जनसंख्या गिनती नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को समझना भी है। इन सवालों में शामिल होंगे:

  • घर की पहचान (भवन संख्या, जनगणना मकान संख्या)
  • घर के फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल सामग्री
  • घर की स्थिति (पक्का, कच्चा या अर्ध-पक्का)
  • घर का उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक या मिश्रित)
  • घर में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या
  • परिवार के मुखिया का नाम और लिंग
  • विवाहित जोड़ों की संख्या
  • उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार
  • पीने के पानी की सुविधा
  • शौचालय और स्वच्छता सुविधाएं
  • बिजली, इंटरनेट और अन्य आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता
  • घर में इस्तेमाल होने वाले ईंधन का प्रकार
  • स्वामित्व वाले वाहनों की संख्या और प्रकार

इन सवालों के जरिए सरकार यह समझने की कोशिश करेगी कि देश में जीवन स्तर किस प्रकार बदल रहा है और किन क्षेत्रों में विकास की आवश्यकता है।

लिव-इन रिलेशन पर बड़ा बदलाव

जनगणना 2026 में सबसे चर्चित बदलाव लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर आया है। FAQ में स्पष्ट किया गया है कि “यदि लिव-इन में रहने वाले दो व्यक्ति एक-दूसरे को स्थायी रूप से अपना जीवनसाथी मानते हैं, तो उन्हें विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा।”यह कदम समाज में बदलती सोच और रिश्तों के नए स्वरूप को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे डेटा संग्रह में भी अधिक सटीकता आएगी।

स्व-गणना पोर्टल: डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम

इस बार जनगणना प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए सरकार ने Self Enumeration Portal लॉन्च किया है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक:

  • घर बैठे अपनी जानकारी भर सकते हैं
  • समय की बचत कर सकते हैं
  • डेटा की सटीकता सुनिश्चित कर सकते हैं

यह पोर्टल दोनों चरणों—हाउस लिस्टिंग और जनसंख्या गणना—के लिए उपलब्ध रहेगा। इससे पारंपरिक कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी।

परिवार और संसाधनों पर विशेष फोकस

जनगणना 2026 केवल लोगों की गिनती तक सीमित नहीं है। इसमें परिवार की संरचना, संसाधनों की उपलब्धता और जीवनशैली को भी विस्तार से समझने का प्रयास किया जा रहा है।

उदाहरण के तौर पर:

  • किस प्रकार का अनाज खाया जाता है
  • घर में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं
  • परिवार का सामाजिक और आर्थिक स्तर क्या है

ये सभी जानकारी सरकार को योजनाएं बनाने और संसाधनों का सही वितरण सुनिश्चित करने में मदद करेंगी।

नीतिगत फैसलों में मिलेगी मदद

जनगणना से प्राप्त डेटा का उपयोग सरकार विभिन्न योजनाओं और नीतियों को तैयार करने में करती है। जैसे:

  • ग्रामीण और शहरी विकास योजनाएं
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
  • रोजगार और बुनियादी ढांचे में सुधार

इसलिए जनगणना में दी गई जानकारी न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के विकास के लिए भी अहम भूमिका निभाती है।

जनगणना 2026 भारत की 16वीं जनगणना होगी, जो आधुनिक तकनीक और सामाजिक बदलावों के साथ आगे बढ़ रही है। 33 सवालों के जरिए सरकार देश की वास्तविक तस्वीर को समझने की कोशिश करेगी। वहीं, लिव-इन रिलेशन को विवाहित के रूप में मान्यता देना एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

डिजिटल पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की सुविधा इस प्रक्रिया को और पारदर्शी और सरल बनाएगी। ऐसे में नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे सही और सटीक जानकारी देकर इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में भागीदारी करें।

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