बाह-बटेश्वर को ‘अटल नगर’ जिला बनाने की मांग तेज, सांसद राजकुमार चाहर ने लोकसभा में उठाया मुद्दा

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नई दिल्ली/आगरा

उत्तर प्रदेश में एक नए जिले के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आगरा जनपद के बाह-बटेश्वर क्षेत्र को अलग जिला बनाकर ‘अटल नगर’ नाम देने की मांग अब संसद तक पहुंच गई है। फतेहपुर सीकरी से सांसद Rajkumar Chahar ने लोकसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

सांसद ने अपने वक्तव्य में कहा कि बाह-बटेश्वर क्षेत्र ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इसे नया जिला घोषित करना समय की मांग है।

अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत से जुड़ा प्रस्ताव

सांसद राजकुमार चाहर ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इस नए जिले का नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के नाम पर ‘अटल नगर’ रखा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि वाजपेयी जी का जन्मस्थल बटेश्वर से गहरा संबंध रहा है और यह क्षेत्र उनकी स्मृतियों से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि वाजपेयी जी की विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए इस तरह का कदम महत्वपूर्ण होगा। इससे न केवल क्षेत्र का गौरव बढ़ेगा बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

भगवान नेमिनाथ की तपोस्थली होने का दावा

बाह-बटेश्वर क्षेत्र को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। सांसद ने लोकसभा में बताया कि यह स्थान जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर Lord Neminath की तपोस्थली रहा है। इसके अलावा यहां स्थित प्राचीन मंदिर समूह, विशेष रूप से बटेश्वर के शिव मंदिर, देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

हर वर्ष लगने वाला बटेश्वर मेला भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है, जिसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। ऐसे में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

प्रशासनिक दूरी बना रही विकास में बाधा

सांसद चाहर ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि बाह-बटेश्वर क्षेत्र आगरा मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी के कारण प्रशासनिक सेवाओं का लाभ लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाता।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और राजस्व से जुड़े मामलों में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि इस क्षेत्र को जिला बना दिया जाता है, तो प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और जनता को राहत मिलेगी।

नया जिला बनने से क्या होंगे फायदे?

यदि बाह-बटेश्वर को ‘अटल नगर’ के रूप में नया जिला बनाया जाता है, तो इसके कई व्यापक लाभ हो सकते हैं:

1. बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण

स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक इकाइयों की स्थापना से शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।

2. तेजी से विकास कार्य

नई जिला इकाई बनने पर सरकार द्वारा विशेष बजट और योजनाएं लागू की जा सकती हैं।

3. पर्यटन को बढ़ावा

बटेश्वर मंदिर समूह और धार्मिक महत्व के कारण यह क्षेत्र पर्यटन हब बन सकता है।

4. रोजगार के अवसर

नई सरकारी संस्थाओं, कार्यालयों और पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

इस प्रस्ताव को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में नए जिलों का गठन हमेशा से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह क्षेत्रीय राजनीति में भी असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मांग स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही अपेक्षाओं को दर्शाती है। वहीं, विपक्षी दल इसे चुनावी रणनीति के रूप में भी देख सकते हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस प्रस्ताव पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, लोकसभा में उठे इस मुद्दे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाती है, तो बाह-बटेश्वर क्षेत्र को एक नई पहचान मिल सकती है और ‘अटल नगर’ के रूप में यह उत्तर प्रदेश का 76वां जिला बन सकता है।

बाह-बटेश्वर को ‘अटल नगर’ जिला बनाने की मांग केवल प्रशासनिक बदलाव का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अब सबकी नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि क्या यह मांग वास्तविकता का रूप ले पाएगी या नहीं।

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