कानपुर 26 March 2026: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में रेलवे की संपत्ति को निशाना बनाने वाले एक शातिर ‘तेल चोर’ गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से ट्रेनों से पेट्रोल और डीजल चोरी कर रेलवे को नुकसान पहुंचा रहे थे। इस कार्रवाई को रेलवे सुरक्षा बल और खुफिया इकाइयों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा ऑपरेशन रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सीआईबी (क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच) की संयुक्त टीम द्वारा चलाया गया। ग्वालियर और कानपुर की टीमों ने मिलकर कानपुर के भीमसेन क्षेत्र में छापेमारी की, जहां पिछले कुछ समय से ट्रेनों से ईंधन चोरी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस को एक मुखबिर से सटीक जानकारी मिली थी कि कुछ लोग रेलवे यार्ड में खड़ी ट्रेनों से पेट्रोल-डीजल निकालकर अवैध रूप से बेच रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर टीम ने इलाके की घेराबंदी की और मौके पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को पकड़ लिया।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान—
- सागर गौतम
- शिवम गौतम

कानपुर में ट्रेनों से ईंधन चोरी का खुलासा, आरोपी शिवम और सागर गौतम हिरासत में।
के रूप में हुई है। दोनों आरोपी कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इस अवैध धंधे में शामिल थे और रेलवे यार्ड में खड़ी ट्रेनों को अपना आसान निशाना बनाते थे।
कैसे करते थे चोरी?
जांच में सामने आया है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से चोरी को अंजाम देते थे—
- दिन के समय रेलवे यार्ड की रेकी (जासूसी) करते थे
- रात के समय सुनसान इलाकों में खड़ी ट्रेनों को निशाना बनाते थे
- विशेष पाइप और उपकरणों की मदद से डीजल-पेट्रोल निकालते थे
- चोरी किए गए ईंधन को कैनों (कट्टियों) में भरकर स्थानीय बाजार में बेच देते थे
इस तरह वे लगातार रेलवे को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे थे।
बरामदगी: ₹34,000 का ईंधन जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
- 15 कट्टी (कैन) पेट्रोल और डीजल
- अनुमानित कीमत करीब ₹34,000
बरामद किया है। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि गिरोह बड़े स्तर पर चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
गिरोह के अन्य सदस्य भी रडार पर
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी अहम जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में कम से कम 4 अन्य सदस्य शामिल हैं, जो अभी फरार हैं।
पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेलवे संपत्ति से छेड़छाड़ और चोरी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
रेलवे सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दिन-दहाड़े और रात के समय ट्रेनों से ईंधन चोरी होना यह दर्शाता है कि—
- कुछ रेलवे यार्डों में निगरानी व्यवस्था कमजोर है
- पर्याप्त CCTV और सुरक्षा गश्त की कमी हो सकती है
- अंदरूनी जानकारी का भी इस्तेमाल किया गया हो सकता है
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध?
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते इस तरह के अपराधों में इजाफा देखा जा रहा है। चोरी किया गया ईंधन आसानी से नकद में बेचा जा सकता है, जिससे अपराधियों को त्वरित लाभ मिलता है।
इसके अलावा—
- बेरोजगारी
- स्थानीय स्तर पर निगरानी की कमी
- अवैध बाजार की मौजूदगी
भी ऐसे अपराधों को बढ़ावा देते हैं।
कानपुर में ‘तेल चोर’ गिरोह का भंडाफोड़ पुलिस और भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी सफलता है। इस कार्रवाई से न केवल रेलवे को हो रहे आर्थिक नुकसान पर अंकुश लगेगा, बल्कि अन्य अपराधियों में भी डर का माहौल बनेगा।
हालांकि, यह घटना यह भी संकेत देती है कि रेलवे यार्ड और खड़ी ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे गिरोह दोबारा सक्रिय हो सकते हैं।



