लखनऊ/अयोध्या। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने रामनवमी के पावन अवसर पर बड़ा और अहम निर्णय लेते हुए प्रदेश में 26 और 27 मार्च को लगातार दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। यह फैसला जनभावनाओं के सम्मान और त्योहार के दौरान बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकार के इस निर्णय से प्रदेशवासियों को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
क्या है सरकार का पूरा फैसला?
प्रदेश सरकार के अनुसार, पहले केवल 26 मार्च को अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 27 मार्च तक कर दिया गया। इस तरह अब राज्य में दो दिन का लगातार अवकाश रहेगा।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि 27 मार्च को बैंक बंद नहीं रहेंगे, क्योंकि इस अवकाश को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत शामिल नहीं किया गया है। यानी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में छुट्टी रहेगी, लेकिन बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

अयोध्या में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार विशेष संयोग और बढ़ती धार्मिक आस्था को देखते हुए संख्या और अधिक होने की संभावना है।
इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि—
- श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- पीने के पानी और मेडिकल सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था हो
- यातायात प्रबंधन को सुचारू रखा जाए

- अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था तैनात की जाए
सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी श्रद्धालु को दर्शन या यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
न्यायालयों में भी बदली छुट्टी की तारीख
रामनवमी को लेकर न्यायिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले अदालतों में अवकाश 26 मार्च को निर्धारित था, लेकिन अब इसे बदलकर 27 मार्च कर दिया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार—
- 26 मार्च को अदालतों में सामान्य कार्य होगा
- 27 मार्च को सभी न्यायालय बंद रहेंगे
यह निर्णय न्यायिक कार्यों को संतुलित रखने के साथ-साथ त्योहार के महत्व को ध्यान में रखकर लिया गया है।
आस्था और जनभावना का सम्मान
सरकार ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से जनभावनाओं के सम्मान में लिया गया है। रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है।
प्रदेश के कई शहरों में इस दिन भव्य शोभा यात्राएं और धार्मिक आयोजन होते हैं। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश देने से लोगों को इन आयोजनों में भाग लेने का पूरा अवसर मिलेगा।
चैत्र नवरात्रि और दुर्लभ संयोग
इस वर्ष की चैत्र नवरात्रि (19–27 मार्च 2026) कई मायनों में विशेष है। लगभग 89 वर्षों बाद एक दुर्लभ संयोग बना है—
- 26 मार्च: अष्टमी और नवमी एक साथ
- 27 मार्च: रामनवमी
इसके साथ ही इस दौरान गजकेसरी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस पर्व की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं।


मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के अंतिम दिनों में मां दुर्गा के दो स्वरूपों की विशेष पूजा की जाती है—
- मां महागौरी (अष्टमी) – शुद्धता, शांति और करुणा की प्रतीक
- मां सिद्धिदात्री (नवमी) – सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाली
इन दिनों में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जो नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।
श्लोक:
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
रामनवमी: धर्म और मर्यादा का प्रतीक
रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका जीवन सत्य, धर्म और आदर्शों का प्रतीक है।
श्लोक:
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे।
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः॥
यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में धर्म, सत्य और मर्यादा का पालन सर्वोपरि है।
पर्व संदेश और धार्मिक मान्यताएं
रामनवमी के दिन घर में कुछ विशेष वस्तुएं लाना शुभ माना जाता है—
- राम दरबार की प्रतिमा
- शंख
- तुलसी का पौधा
इनसे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वास होता है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रामनवमी पर दो दिन का अवकाश घोषित करना एक बड़ा और दूरदर्शी निर्णय माना जा रहा है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को धार्मिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि प्रशासन को भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभालने में मदद मिलेगी।
अयोध्या सहित पूरे प्रदेश में इस बार रामनवमी का पर्व भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप में मनाए जाने की पूरी तैयारी है। सरकार का यह कदम धार्मिक आस्था और जनभावनाओं के सम्मान का स्पष्ट संकेत देता है।



