वाशिंगटन, 7 जनवरी 2026 – अमेरिकी व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के मुद्दे पर सैन्य बल का उपयोग “हमेशा विकल्प” के रूप में मौजूद है। यह बयान अमेरिकी प्रशासन द्वारा उस कूटनीतिक और सुरक्षा चर्चा का हिस्सा है जिसमें ग्रीनलैंड की भू-रणनीतिक स्थिति और बढ़ते वैश्विक प्रभाव का विश्लेषण किया जा रहा है।
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव कैरोलीन लिविट ने कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर “विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला” पर विचार किया जा रहा है, जिसमें कूटनीतिक बातचीत, संभावित खरीद प्रस्ताव और सैन्य हस्तक्षेप शामिल हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि शांति-पूर्ण तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि सैनिक विकल्प पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बयान का उद्देश्य बढ़ती रूस और चीन की आर्कटिक रणनीति के बीच संतुलन रखना और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर अमेरिकी नेतृत्व को दृढ़ दिखाना है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने अमेरिकी बयान का कड़ा विरोध किया है और इसे उनके संविधान और संप्रभुता के खिलाफ बताया है।
यूरोपीय देशों ने भी किया है चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी सैन्य कदम से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा और नाटो जैसे सहयोगी संगठन में दरार आ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक सुरक्षा नीति के विषय से कहीं आगे बढ़ गया है और वैश्विक कूटनीति तथा भू-रणनीति में नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है।
अमेरिका में प्रतिक्रिया
अमेरिका के भीतरी राजनीतिक परिदृश्य में इस मुद्दे पर मत विभाजित हैं:
कुछ सांसदों का कहना है कि सैन्य विकल्प का खुलकर ज़िक्र करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।
जबकि कुछ सुरक्षा विशेषज्ञ अमेरिकी हितों को सुरक्षित रखने के लिए कड़ा रुख अपनाने का समर्थन कर रहे हैं।
संक्षेप:
व्हाइट हाउस ने ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य बल को अंतिम विकल्प के रूप में स्वीकारा, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है। डेनमार्क, ग्रीनलैंड और यूरोपीय नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है, जबकि अमेरिका के भीतर भी इस दिशा पर गहन बहस जारी है।



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