ऐतिहासिक मोड़ पर कच्चाथीवु विवाद 2025: तमिलनाडु विधानसभा से प्रधानमंत्री मोदी तक उठी तेज़ मांग
नई दिल्ली: एक बार फिर कच्चाथीवु विवाद 2025 ने भारतीय राजनीति में तूफान ला दिया है। तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से श्रीलंका के कब्ज़े वाले कच्चतीवू द्वीप को वापस लाने की मांग की है। वहीं, तमिल अभिनेता से नेता बने विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे 99 वर्षों के लिए पट्टे पर लेने की अपील की है। पीएम मोदी इन दिनों श्रीलंका के दौरे पर हैं, जिससे यह मुद्दा और गरमा गया है।

कच्चाथीवु क्या है?
कच्चतीवू एक छोटा द्वीप है जो पाल्क स्ट्रेट में स्थित है। यह भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के जाफना के बीच आता है। वर्ष 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारत ने यह द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया था। यह सौंपना 26 और 28 जून 1974 तथा 23 मार्च 1976 को हुए द्विपक्षीय समझौतों के तहत हुआ था।
तमिलनाडु की विधानसभा ने क्या कहा?
तमिलनाडु विधानसभा ने हाल ही में एक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा, “कच्चतीवू को वापस लाना ही एकमात्र समाधान है।” मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने श्रीलंकाई नौसेना द्वारा मछुआरों की गिरफ्तारी पर चिंता जताते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
बीजेपी का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को कटघरे में खड़ा किया है। बीजेपी प्रवक्ता सी. आर. केसवन ने कहा, “जब DMK केंद्र में सत्ता में थी (2004-2013) और राज्य में (2006-2011), तब क्या उन्होंने कभी इस द्वीप को वापस लेने का कोई प्रस्ताव लाया?”
भाजपा ने DMK पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि 1967 से 1976 तक राज्य की सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने इस सौंपने के विरोध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
विजय का प्रस्ताव: 99 साल के लिए पट्टे पर ले भारत
तमिलगा वेट्रि कझगम पार्टी के प्रमुख विजय ने कहा कि तमिल मछुआरों की परेशानियों का स्थायी समाधान तभी होगा जब कच्चतीवू को भारत वापस ले आए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि जब तक यह वापसी संभव नहीं, तब तक द्वीप को 99 साल के लिए पट्टे पर लिया जाए।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कच्चाथीवु विवाद 2025 पर कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। 31 मार्च 2024 को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा, “कच्चतीवू को सौंपने से हर भारतीय को गुस्सा आया है। इससे यह भी साबित होता है कि कांग्रेस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता।”
मोदी ने कांग्रेस पर 75 वर्षों से भारत की एकता, अखंडता और हितों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
इतिहास की पृष्ठभूमि और भविष्य की राह
1974 में भारत और श्रीलंका के बीच हुए समझौते के तहत भारत ने कच्चतीवू पर अपने अधिकार को छोड़ दिया था, लेकिन तमिलनाडु के मछुआरे इस फैसले को आज भी गलत मानते हैं। RTI के तहत सामने आए दस्तावेज़ बताते हैं कि नेहरू भी इस द्वीप को सौंपने के पक्ष में थे।
निष्कर्ष
कच्चाथीवु विवाद 2025 एक ऐसा मुद्दा बन चुका है जो भारत की विदेश नीति, आंतरिक राजनीति और तमिलनाडु के मछुआरों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है। जहां एक ओर विधानसभा और जनता इसे वापस लाने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के दौरान इस पर कोई ठोस निर्णय लेंगे? या फिर यह मुद्दा भी आने वाले लोकसभा चुनावों का एक और भावनात्मक हथियार बन जाएगा? वक्त ही बताएगा।


