
नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने इस विधेयक पर मतदान की मांग की है, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार इसे सहजता से पारित कराने की स्थिति में दिख रही है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024: संसद में सरकार की स्थिति मज़बूत
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन 293 सदस्यों के साथ बहुमत में है। किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए 272 मतों की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का INDIA गठबंधन 235 सांसदों के साथ संसद में मौजूद है, जबकि गैर-संरेखित दलों जैसे एआईएमआईएम, वाईएसआरसीपी और आजाद समाज पार्टी के कुल 6 सांसद भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
एनडीए के समर्थन में प्रमुख दल:
- भाजपा: 240 सांसद
- तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी): 16 सांसद
- जनता दल (यूनाइटेड) [जदयू]: 12 सांसद
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): 5 सांसद
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): 7 सांसद
- राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी), जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) और जनसेना पार्टी (जेपी): 2-2 सांसद
- एनसीपी, अपना दल, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन, असम गण परिषद (एजीपी), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल), और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम): 1-1 सांसद
हालांकि, जदयू और टीडीपी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के कुछ प्रावधानों पर असहमति जताई है, लेकिन वे इसे समर्थन देने की संभावना में हैं। इन दलों के कुछ सांसदों ने विधेयक के कुछ धाराओं में संशोधन की मांग रखी है।
विपक्षी दलों का रुख
इस विधेयक का कड़ा विरोध करने वाले दलों में कांग्रेस (99 सांसद), समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद), डीएमके (22 सांसद), शिवसेना (उद्धव गुट) [9 सांसद], एनसीपी (शरद पवार गुट) [8 सांसद], माकपा (4 सांसद), राजद (4 सांसद), आम आदमी पार्टी (3 सांसद), झारखंड मुक्ति मोर्चा (3 सांसद), आईयूएमएल (3 सांसद), और जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (2 सांसद) शामिल हैं। अन्य 13 सांसदों ने भी इस विधेयक के खिलाफ मतदान करने की घोषणा की है।
गठबंधन दलों की शर्तें
- जदयू की मांग: जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय झा ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी किसी भी प्रावधान के ‘पिछले प्रभाव’ (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) में लागू होने के खिलाफ है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए किए गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए जदयू इस विधेयक में संशोधन की मांग कर रही है।
- टीडीपी की शर्त: टीडीपी ने कहा है कि वक्फ बोर्डों में गैर-मुसलमानों को शामिल करने का अधिकार राज्यों के पास रहना चाहिए। हालांकि, उन्होंने विधेयक में महिलाओं को वक्फ बोर्डों में शामिल करने के प्रावधान का समर्थन किया है।
विधेयक पर संसद में चर्चा
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को संसद की 31-सदस्यीय संयुक्त समिति की सिफारिशों के साथ लोकसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। इस पर बुधवार को दोपहर 12 बजे से चर्चा शुरू होगी और आठ घंटे का समय निर्धारित किया गया है। चर्चा के बाद केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू विधेयक पर जवाब देंगे और सदन की मंजूरी मांगेंगे।
विपक्षी दलों ने इस पर कम से कम 12 घंटे की चर्चा की मांग की थी, लेकिन इसे मंजूरी नहीं दी गई।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर निष्कर्ष
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर संसद में जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है। एनडीए की संख्यात्मक बढ़त होने के बावजूद, गठबंधन दलों की मांगों को लेकर सरकार को कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं। विपक्षी दल इस विधेयक को ‘सांप्रदायिक और असंवैधानिक’ बताते हुए पूरी ताकत से विरोध करने की तैयारी में हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बुधवार को लोकसभा में क्या होता है और यह विधेयक किन शर्तों के साथ पारित होता है।


