यूपी में ईद की नमाज पर रोक, कांग्रेस ने लगाया भेदभाव का आरोप

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“संभल में प्रशासन द्वारा ईद और अलविदा जुमे की नमाज के सार्वजनिक आयोजन पर प्रतिबंध।”

 

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने अलविदा जुमे और ईद की नमाज को सड़कों और छतों पर पढ़ने से रोकने का आदेश दिया है। यह फैसला 28 मार्च और 31 मार्च को होने वाली नमाज को लेकर लिया गया है।

प्रशासन ने दी सफाई, कांग्रेस ने किया विरोध

संभल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) शिरीष चंद्रा ने कहा कि “सड़कें सरकार की संपत्ति हैं, इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” प्रशासन ने सभी मुस्लिम संगठनों से मस्जिदों या अपने घरों में ही नमाज अदा करने का अनुरोध किया है।

हालांकि, इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “सरकार सड़कों पर नमाज पढ़ने को तो रोक रही है, लेकिन अन्य आयोजनों के लिए सड़कें जाम करना क्यों स्वीकार्य है?”

उन्होंने आगे कहा, “अगर सरकार सड़कों पर नमाज पढ़ने को रोक रही है, तो क्या यह नियम अन्य समुदायों के धार्मिक आयोजनों पर भी लागू होगा?”

बीजेपी का समर्थन, कांग्रेस का विरोध

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि यह फैसला “मुसलमानों को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाने की दिशा में एक और कदम है।” उन्होंने कहा, “अगर सरकार मुस्लिम समाज को कोई उपहार देना चाहती है, तो उन्हें सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार का उपहार दे, न कि इस तरह के प्रतिबंधों का।”

बीजेपी ने इस फैसले का समर्थन किया और कहा कि “नमाज मस्जिद या घर के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए।”

बीजेपी नेता दिनेश शर्मा ने कहा, “प्रशासन का यह निर्णय पूरी तरह सही और न्यायसंगत है। धार्मिक गतिविधियों को सार्वजनिक स्थानों पर करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।”

संभल प्रशासन के इस फैसले के बाद, राज्य में माहौल गरमाया हुआ है और राजनीतिक पार्टियों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी है।

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