2026 में एक बार फिर दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक माहौल गरमा गया है। ताजा घटनाक्रम में पाकिस्तान द्वारा काबुल के आसपास हवाई हमले किए जाने की खबरों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए हैं।
इस रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की, इसके पीछे क्या रणनीतिक कारण हैं, दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ क्या है और इस संघर्ष का क्षेत्रीय तथा वैश्विक असर क्या हो सकता है।
पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की: तात्कालिक कारण
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने सीमापार मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई का सीधा संबंध तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी से जोड़ा जा रहा है।
पाकिस्तान के अनुसार टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान की सीमा के भीतर सुरक्षित ठिकानों से पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। हाल के महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हमलों में वृद्धि हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान प्रशासन टीटीपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।
यही वह मुख्य बिंदु है जिसके आधार पर पाकिस्तान ने काबुल के निकट लक्षित हवाई हमले किए।
1. टीटीपी का बढ़ता प्रभाव
पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की इसका पहला बड़ा कारण टीटीपी की बढ़ती गतिविधियां हैं।
टीटीपी लंबे समय से पाकिस्तान के लिए आंतरिक सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद टीटीपी के कई लड़ाके अफगान सीमा क्षेत्रों में सक्रिय हो गए। पाकिस्तान का कहना है कि इन समूहों को सीमा पार से समर्थन या शरण मिल रही है।
हाल के हमलों में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और पुलिस चौकियों को निशाना बनाया गया। इससे पाकिस्तान सरकार पर घरेलू दबाव बढ़ा कि वह निर्णायक कदम उठाए।
2. ड्यूरंड लाइन विवाद
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। ड्यूरंड लाइन को लेकर दोनों देशों के बीच दशकों से असहमति रही है।
अफगानिस्तान ऐतिहासिक रूप से ड्यूरंड लाइन को औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में पूरी तरह स्वीकार नहीं करता। पाकिस्तान इस सीमा को वैध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानता है।
सीमा पर बाड़ लगाने और चौकियों के निर्माण को लेकर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की इस प्रश्न का एक उत्तर यह भी है कि वह सीमा सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश देना चाहता है।
3. घरेलू राजनीतिक दबाव
2026 में पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति भी अस्थिर दौर से गुजर रही है। आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच सुरक्षा मुद्दा सरकार के लिए प्राथमिकता बन गया है।
जब किसी देश में आतंरिक हमले बढ़ते हैं तो सरकार पर यह दबाव होता है कि वह कठोर कदम उठाए। काबुल के पास हवाई हमले को कुछ विश्लेषक घरेलू दर्शकों के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखते हैं।
पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की इसका यह पहलू राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा है।
4. क्षेत्रीय शक्ति संतुलन
अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद क्षेत्रीय शक्ति समीकरण बदले हैं। चीन, रूस, ईरान और मध्य एशियाई देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान में प्रभाव बनाए रखना चाहता है। यदि उसे लगता है कि अफगान प्रशासन उसके सुरक्षा हितों की अनदेखी कर रहा है तो वह दबाव की नीति अपना सकता है।
इस कार्रवाई के जरिए पाकिस्तान ने यह संकेत दिया कि वह अपनी सुरक्षा चिंताओं पर समझौता नहीं करेगा।
5. कूटनीतिक वार्ता की विफलता
दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और प्रत्यर्पण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकले।
जब कूटनीतिक चैनल प्रभावी समाधान देने में असफल रहते हैं तो सैन्य विकल्पों की संभावना बढ़ जाती है। पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की इसका एक कारण यह भी है कि वार्ता प्रक्रिया से उसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया
अफगान प्रशासन ने पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह उनकी संप्रभुता का उल्लंघन है।
अफगान पक्ष का दावा है कि पाकिस्तान अपने आंतरिक सुरक्षा संकट का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीमा पार कार्रवाई दोहराई गई तो जवाब दिया जाएगा।
इस बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है।
सीमा पर बढ़ता सैन्य तनाव
काबुल पर बमबारी की खबरों के बाद सीमा क्षेत्रों में सैनिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। अतिरिक्त बलों की तैनाती और चौकसी में वृद्धि की गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो सीमित संघर्ष बड़े टकराव में बदल सकता है। दक्षिण एशिया पहले ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है ऐसे में यह नया संकट अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है। क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
यदि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर व्यापार मार्गों, शरणार्थी संकट और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर पड़ सकता है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा और मध्य एशिया से जुड़ी परियोजनाएं भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
मानवीय संकट की आशंका
काबुल और आसपास के इलाकों में रहने वाले नागरिकों में भय का माहौल है। यदि हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है तो विस्थापन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
अफगानिस्तान पहले से ही आर्थिक और मानवीय संकट से जूझ रहा है। ऐसे में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
क्या आगे बढ़ सकता है संघर्ष
पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की यह सवाल केवल वर्तमान घटना तक सीमित नहीं है बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करता है।
यदि दोनों देश संवाद की राह नहीं अपनाते तो सीमापार झड़पें बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर यदि क्षेत्रीय मध्यस्थता सफल रहती है तो तनाव कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए तीन प्रमुख कदम आवश्यक हैं
संयुक्त सीमा निगरानी तंत्र
आतंकवाद विरोधी समन्वित अभियान
नियमित उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद
2026 में पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की यह प्रश्न दक्षिण एशियाई राजनीति और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालता है। टीटीपी की गतिविधियां, सीमा विवाद, घरेलू राजनीतिक दबाव और कूटनीतिक विफलता इस कार्रवाई के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों के लिए यह आवश्यक है कि वे सैन्य विकल्पों के बजाय संवाद और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ें। अन्यथा यह तनाव न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या स्थिति और जटिल होती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने काबुल पर बमबारी क्यों की यह सवाल केवल एक सैन्य कार्रवाई का नहीं बल्कि व्यापक रणनीतिक समीकरण का हिस्सा है।
दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश किस तरह संतुलित और जिम्मेदार नीति अपनाते हैं।
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