नई दिल्ली/कोलकाता: पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो गई है और इसके साथ ही चुनाव आयोग ने कई अहम प्रशासनिक फैसले भी लिए हैं।
सबसे बड़ी कार्रवाई पश्चिम बंगाल में देखने को मिली, जहां राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के गृह सचिव को भी बदल दिया गया है। इन फैसलों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विपक्ष तथा सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि ये कदम चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि पश्चिम बंगाल में प्रशासन का राजनीतिकरण हो चुका था और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए यह कदम जरूरी था।
आदर्श आचार संहिता लागू, चुनाव आयोग ने दी सफाई
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद स्पष्ट किया कि अब पूरे चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने से पहले जो भी प्रशासनिक फैसले लिए गए थे, वे संबंधित राज्य सरकारों का विशेषाधिकार थे। लेकिन अब चुनाव आयोग की निगरानी में सभी प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होंगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा,
“सबसे पहले मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि आदर्श आचार संहिता अब से लागू हो गई है। आचार संहिता लागू होने से पहले की गई कार्रवाइयां संबंधित सरकारों का अधिकार थीं, लेकिन अब चुनाव आयोग पूरे चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनावी चरणों को लेकर विस्तृत समीक्षा की है।
बंगाल में चुनाव चरणों को लेकर बड़ा फैसला
पिछले चुनावों में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था। हालांकि इस बार चुनाव आयोग ने चरणों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, आयोग ने विभिन्न एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का आकलन किया। इसके बाद यह तय किया गया कि चरणों की संख्या कम की जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और सुविधाजनक हो सके।
चुनाव आयोग का मानना है कि कम चरणों में चुनाव कराने से सुरक्षा बलों की बेहतर तैनाती और प्रशासनिक प्रबंधन में भी आसानी होगी।
मुख्य सचिव और गृह सचिव में बदलाव
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल की खबर सामने आई।
सूत्रों के मुताबिक:
IAS अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को मुख्य सचिव पद से हटा दिया गया है।
उनकी जगह दुष्यंत नरियाला को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को भी उनके पद से हटाया गया है।
उनकी जगह संघमित्रा घोष को नया प्रिंसिपल सेक्रेटरी (होम) बनाया गया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है।
भाजपा ने बताया जरूरी कदम
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और सांसद सामिक भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग के फैसले का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में प्रशासन पूरी तरह राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहा था और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी खराब थी।
भट्टाचार्य के अनुसार,
“पश्चिम बंगाल के प्रशासन का राजनीतिकरण हो चुका है। राज्य में कानून-व्यवस्था की पूरी अनुपस्थिति है। चुनाव से पहले हिंसा की घटनाएं होती रही हैं और प्रशासन की जिम्मेदारी को जनता अच्छी तरह समझती है। इसलिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही कदम उठाया है।”
भाजपा नेताओं का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रशासनिक निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
पांच राज्यों में चुनाव से बढ़ा राजनीतिक तापमान
इस बार जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें शामिल हैं:
पश्चिम बंगाल
तमिलनाडु
केरल
असम
पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश)
इन सभी राज्यों में चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टियां अपने-अपने चुनावी अभियान की रणनीति तैयार कर रही हैं।
भाजपा का दावा: पांचों राज्यों में बेहतर प्रदर्शन
दिल्ली में भाजपा सांसद राजेश मिश्रा ने चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद दावा किया कि पार्टी इन सभी राज्यों में मजबूत प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने कहा,
“हम हर जगह सरकार बनाने जा रहे हैं। असम में हमारी सरकार बनना तय है और इस बार पहले से भी अधिक बहुमत से जीतेंगे। पश्चिम बंगाल में भी हमारी सरकार बनने जा रही है। तमिलनाडु में भी पहली बार ऐसा माहौल बन रहा है कि भाजपा सरकार बनाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी। केरल और पुडुचेरी में भी हमारी उपस्थिति मजबूत होगी।”
भाजपा नेताओं का मानना है कि इस बार चुनावी परिणाम कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
तमिलनाडु और केरल में भी हो सकते हैं प्रशासनिक बदलाव
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु और केरल में भी प्रशासनिक स्तर पर कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग आवश्यक कदम उठा सकता है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस
चुनाव से पहले बड़े प्रशासनिक बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस शुरू हो गई है।
कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए और किसी भी प्रकार की राजनीतिक धारणा से दूर रहना चाहिए।
वहीं आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव आयोग को कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जिनसे राजनीतिक विवाद पैदा हो जाते हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
चुनावी माहौल में बढ़ेगी राजनीतिक बयानबाजी
चुनाव की घोषणा के साथ ही अब सभी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
आने वाले दिनों में:
चुनावी रैलियां तेज होंगी
उम्मीदवारों की घोषणा होगी
गठबंधन और रणनीति तय होंगी
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
निष्पक्ष चुनाव पर टिकी सबकी नजर
देश के पांच राज्यों में होने वाले इन विधानसभा चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव आयोग का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव कराना है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और इन राज्यों की राजनीति किस दिशा में जाती है।



