वॉशिंगटन, 24 फरवरी — अमेरिका में नए ग्लोबल इंपोर्ट टैरिफ लागू होने के साथ ही व्यापार जगत में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। अमेरिकी प्रशासन ने मंगलवार आधी रात से 10% का अस्थायी आयात शुल्क वसूलना शुरू कर दिया, जबकि Donald Trump पहले ही इसे 15% तक बढ़ाने का संकेत दे चुके हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार राष्ट्रपति के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और 15% टैरिफ लागू करने की दिशा में काम जारी है।


10% या 15%? क्यों है भ्रम की स्थिति
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लागू करने की घोषणा की थी। यह कदम उस व्यापक आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए पुराने टैरिफ की जगह लेने के लिए उठाया गया, जिन्हें हाल ही में Supreme Court of the United States ने निरस्त कर दिया था।
हालांकि, शनिवार को ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि टैरिफ दर 15% होगी। इसके बावजूद, सोमवार देर रात U.S. Customs and Border Protection (CBP) ने शिपर्स को सूचित किया कि लागू दर 10% ही रहेगी। चूंकि राष्ट्रपति ने अभी तक 15% दर के लिए औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है, इसलिए CBP केवल प्रकाशित आदेशों के आधार पर ही कार्रवाई कर सकता है।
Section 122 के तहत कार्रवाई
ट्रंप प्रशासन ने यह कदम 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत उठाया है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को “गंभीर और बड़े भुगतान संतुलन घाटे” की स्थिति में 150 दिनों तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
ट्रंप के आदेश में तर्क दिया गया है कि अमेरिका 1.2 ट्रिलियन डॉलर के वार्षिक वस्तु व्यापार घाटे, GDP के 4% के बराबर चालू खाता घाटे और प्राथमिक आय अधिशेष में गिरावट जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि ये संकेतक भुगतान संतुलन संकट की ओर इशारा करते हैं।
हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों और व्यापार कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका फिलहाल किसी तत्काल बैलेंस-ऑफ-पेमेंट संकट के कगार पर नहीं है। ऐसे में यह नया टैरिफ कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।
शेयर बाजार और वैश्विक प्रतिक्रिया
यूरोपीय शेयर बाजारों में मंगलवार को शुरुआती गिरावट देखी गई। पैन-यूरोपीय STOXX 600 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में नीचे खुला, हालांकि बाद में स्थिर हो गया। निवेशकों का कहना है कि टैरिफ दर को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
जर्मन बैंक ING के ग्लोबल मैक्रो हेड कार्स्टन ब्रजेस्की के अनुसार, “भले ही 150 दिन की समयसीमा तय हो, लेकिन राष्ट्रपति तकनीकी रूप से इसे बार-बार बढ़ा सकते हैं, जिससे व्यापारिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रह सकती है।”
व्यापार समझौतों पर ट्रंप की चेतावनी
सोमवार को ट्रंप ने उन देशों को कड़ी चेतावनी दी जो अमेरिका के साथ पहले से हुए व्यापार समझौतों से पीछे हटने की सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश समझौते का पालन नहीं करता, तो उस पर अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत और भी अधिक टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
जापान ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि नए टैरिफ ढांचे में उसे मौजूदा समझौते के समान ही अनुकूल व्यवहार मिले। वहीं यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ताइवान ने भी संकेत दिया है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों को बरकरार रखना चाहते हैं।
चीन की प्रतिक्रिया
इस बीच चीन ने अमेरिका से “एकतरफा टैरिफ” छोड़ने की अपील की है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने संकेत दिया कि वह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ एक और दौर की व्यापार वार्ता के लिए तैयार है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो वैश्विक बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल 10% टैरिफ लागू है, जबकि 15% दर को लेकर औपचारिक आदेश का इंतजार है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए पुराने टैरिफ के तहत जमा की गई राशि कंपनियों को वापस मिलेगी या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में राष्ट्रपति के संबोधन या नए कार्यकारी आदेश से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। तब तक वैश्विक व्यापार जगत और निवेशक समुदाय अमेरिकी टैरिफ नीति पर नजर बनाए रखेंगे।US Tariffs 2026 ने वैश्विक व्यापार वातावरण में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। 10% से 15% तक संभावित वृद्धि, कानूनी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं आने वाले महीनों में विश्व अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकती हैं।



