शंकराचार्य पर FIR को लेकर सियासत तेज, अखिलेश यादव का हमला,भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ


लखनऊ/वाराणसी: शंकराचार्य पर दर्ज FIR को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने यूपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने “फिर साबित कर दिया है कि वह किसी की सगी नहीं है।” उन्होंने नारा दिया— “भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ।”

मामले ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि संत समाज के भीतर भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। विभिन्न अखाड़ों और संत संगठनों के प्रमुखों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला संवेदनशील और बहुआयामी है।

शंकराचार्य पर FIR को लेकर बयान देते अखिलेश यादव और मठ में पहुंचे सपा नेता।
शंकराचार्य पर FIR से सियासत गरम: अखिलेश यादव का BJP पर हमला, संत समाज में मतभेद

अखिलेश यादव का सीधा हमला

अखिलेश यादव ने बयान जारी करते हुए कहा कि सच्चे संतों का अपमान कर भाजपा ने अपनी पुरानी कार्यशैली दोहरा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की “कु-कार्यशैली” यह रही है कि जो भी उनके ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने कहा कि सत्ता का उपयोग दबाव बनाने और विरोध की आवाज को कुचलने के लिए किया जा रहा है। उनके मुताबिक, “भ्रष्ट-भाजपाई और उनके सत्ता-सहयोगी एक आपराधिक त्रिगुट की तरह काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य सिर्फ धन और सत्ता प्राप्त करना है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर भी दिया गया हो सकता है, क्योंकि धार्मिक मुद्दों पर भाजपा को घेरना सपा की रणनीति का हिस्सा रहा है।


सपा प्रतिनिधिमंडल मठ पहुंचा

अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव शंकराचार्य के मठ पहुंचे और समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्य की गिरफ्तारी की कोशिश की जाती है, तो पार्टी इसका विरोध करेगी।

सुजीत यादव ने स्पष्ट कहा, “जो कुछ शंकराचार्य के साथ किया जा रहा है, वह अनुचित है। गिरफ्तारी की स्थिति में विरोध का स्वरूप कैसा होगा, यह समय बताएगा।”

यह बयान प्रशासन के लिए भी एक संकेत माना जा रहा है कि मामला राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है।


संत समाज में मतभेद

शंकराचार्य पर लगे आरोपों को लेकर संत समाज एकजुट नहीं दिख रहा है। अलग-अलग संतों और अखाड़ों ने संतुलित, सशर्त या संदेहात्मक प्रतिक्रियाएं दी हैं।

  • Ravindra Puri, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कहा कि यह जांच का विषय है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को दंड मिलना चाहिए, और यदि आरोप झूठे हैं तो साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए।

  • अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इसे गंभीर मामला बताया और कहा कि इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं होगा।

  • तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि जब तक जांच पूरी न हो जाए, टिप्पणी करना उचित नहीं है।

  • जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर योग योगेश्वरी यति ने आरोपों को संभावित रूप से “प्रायोजित” बताया और कहा कि अचानक ऐसे आरोप सामने आना संदेह पैदा करता है।

  • श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा के सेक्रेटरी महंत रतन गिरी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी।

  • किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना गिरी ने आरोपों को राजनीति से जोड़ने की कोशिशों पर आपत्ति जताई।

इन बयानों से स्पष्ट है कि संत समाज इस मामले को लेकर विभाजित है—कुछ इसे निष्पक्ष जांच का विषय मान रहे हैं, तो कुछ इसे संभावित साजिश बता रहे हैं।


भावुक दृश्य: महिला की आंखों में आंसू

मामले के बीच एक भावुक दृश्य भी सामने आया। शंकराचार्य के समक्ष एक महिला फूट-फूटकर रोने लगी। यह घटना तब हुई जब वह सुबह आशीर्वाद लेने पहुंची थी।

महिला की भावुकता पर शंकराचार्य ने कहा, “रोना तब आता है जब आपका गुरु गलत निकल जाए। किसी के षड्यंत्र पर रोने की जरूरत नहीं है।”

महिला ने इशारों में समर्थन जताते हुए कहा कि उनके साथ भगवती हैं। इस पर शंकराचार्य ने टिप्पणी की कि “सरकारों को ऐसे शंकराचार्य चाहिए जो जी-हुजूरी करें, लेकिन हम जी-हुजूरी करने वाले नहीं हैं।”

यह बयान सीधे तौर पर सत्ता प्रतिष्ठान पर टिप्पणी माना जा रहा है।


राजनीतिक और सामाजिक असर

मामला अब केवल कानूनी नहीं रह गया है, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव दिख रहा है। एक ओर विपक्ष इसे संत समाज के सम्मान से जोड़कर सरकार पर हमला कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संतों का एक वर्ग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

धार्मिक नेतृत्व पर लगे आरोप हमेशा संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इससे करोड़ों अनुयायियों की आस्था जुड़ी होती है। ऐसे में प्रशासन के लिए संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि मामला लंबा खिंचता है या गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई होती है, तो यह प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। सपा इसे “सनातन बनाम सत्ता” के फ्रेम में पेश करने की कोशिश कर सकती है, जबकि भाजपा इसे कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया का विषय बता सकती है।


आगे क्या?

फिलहाल जांच की प्रक्रिया जारी है और प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है। संत समाज की प्रतिक्रिया, प्रशासनिक कदम और विपक्ष की रणनीति—तीनों इस प्रकरण की दिशा तय करेंगे।

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