दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में बहुप्रतीक्षित नमो भारत RRTS और मेरठ मेट्रो परियोजना को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग ₹30,274 करोड़ की लागत से विकसित यह मेगा ट्रांजिट प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देने वाला माना जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली से मेरठ के बीच तेज, सुरक्षित और विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।


क्या है Namo Bharat RRTS?
Delhi-Meerut RRTS भारत का पहला रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर है, जिसे आम बोलचाल में ‘नमो भारत’ ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है। यह हाई-स्पीड, सेमी-हाई स्पीड रेल प्रणाली है, जो 160 किमी प्रति घंटे तक की अधिकतम गति के साथ क्षेत्रीय शहरों को जोड़ती है। परियोजना के संचालन और विकास की जिम्मेदारी National Capital Region Transport Corporation (NCRTC) के पास है।
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 82 किलोमीटर है। इसके शुरू होने से दिल्ली से मेरठ का सफर, जो पहले सड़क मार्ग से 2 से 3 घंटे तक लेता था, अब लगभग 55-60 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह समय की बचत न केवल यात्रियों के लिए राहत है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने वाला कदम है।
मेरठ मेट्रो: शहर के भीतर आधुनिक परिवहन
RRTS के साथ-साथ मेरठ शहर के अंदर मेरठ मेट्रो सेवा भी शुरू की गई है। यह सेवा शहर के प्रमुख इलाकों को जोड़ते हुए स्थानीय यात्रियों के लिए तेज और सुविधाजनक विकल्प प्रदान करेगी। RRTS और मेट्रो का एकीकृत मॉडल भारत में शहरी और क्षेत्रीय परिवहन के समन्वित विकास का उदाहरण माना जा रहा है।
मेरठ मेट्रो स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं—एस्केलेटर, लिफ्ट, डिजिटल टिकटिंग, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और सुरक्षा सिस्टम—से लैस किया गया है। इससे यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और समयबद्ध यात्रा का अनुभव मिलेगा।
₹30,274 करोड़ की परियोजना का आर्थिक प्रभाव
करीब ₹30,274 करोड़ की लागत से विकसित यह परियोजना केवल परिवहन सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की रणनीति का हिस्सा भी है। बेहतर कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली और मेरठ के बीच रोजाना आवागमन करने वाले लाखों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, RRTS कॉरिडोर के आसपास नए व्यावसायिक केंद्र विकसित होने की संभावना है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिलेगी। साथ ही, निजी वाहनों की संख्या घटने से ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।
पर्यावरण और तकनीक पर विशेष ध्यान
नमो भारत RRTS को ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ के रूप में विकसित किया गया है। ट्रेनों में ऊर्जा दक्षता, रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम और आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। स्टेशनों को सोलर पावर और वर्षा जल संचयन जैसी पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाओं से जोड़ा गया है।
सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेनों में CCTV, इमरजेंसी अलार्म, महिला कोच की व्यवस्था और अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। डिजिटल टिकटिंग और स्मार्ट कार्ड प्रणाली से यात्रा प्रक्रिया को कैशलेस और आसान बनाया गया है।
NCR की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट
यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करेगी। दिल्ली मेट्रो, बस सेवाओं और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के साथ इंटरकनेक्टिविटी से यात्रियों को सहज ट्रांजिट अनुभव मिलेगा। भविष्य में RRTS के अन्य कॉरिडोर—जैसे दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत—पर भी काम चल रहा है, जिससे NCR के विकास को व्यापक आयाम मिलेगा।
प्रधानमंत्री का संबोधन
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह परियोजना ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने इसे आधुनिक भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का प्रतीक बताया और कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से युवाओं, किसानों और उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे।
नमो भारत RRTS और मेरठ मेट्रो का शुभारंभ NCR के लिए ऐतिहासिक क्षण है। ₹30,274 करोड़ की इस परियोजना से न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। हाई-स्पीड, सुरक्षित और तकनीक-समर्थित यह ट्रांजिट सिस्टम भारत के शहरी परिवहन मॉडल में एक नई मिसाल स्थापित करता है।


