विश्व शांति का मंत्र तर्क नहीं सद्भाव’ जैसलमेर में मोहन भागवत का बड़ा बयान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया में बढ़ते संघर्ष और युद्धों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए केवल तर्क या बहस पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए आपसी सद्भाव और एकता की भावना जरूरी है।
शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित ‘चादर महोत्सव’ में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में चल रहे युद्ध और झगड़े इसलिए खत्म नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे के बीच की मूलभूत एकता को समझ नहीं पा रहे हैं।

दुनिया में बढ़ते संघर्ष पर चिंता
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष जारी हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद बड़े संगठन भी इन विवादों को पूरी तरह रोक पाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे संगठन भी कई बार वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल दिखाई देते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि दुनिया के देश और समाज एक-दूसरे के साथ वास्तविक एकता और विश्वास की भावना को नहीं समझ पा रहे हैं।
‘ईश्वर के रूप अलग लेकिन सत्य एक’
मोहन भागवत ने अपने भाषण में धार्मिक और सांस्कृतिक एकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में ईश्वर को मानने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सत्य केवल एक ही है।
उनके अनुसार, जब लोग यह समझेंगे कि अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के बावजूद मानवता एक है, तभी दुनिया में शांति स्थापित हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि अगर हम इस मूल एकता को नजरअंदाज करते रहेंगे तो दुनिया में टकराव और संघर्ष खत्म नहीं हो पाएंगे।
सद्भाव से सुलझेंगे विवाद
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विवादों को केवल तर्क या बहस के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज और देशों के बीच आपसी सम्मान, समझ और सद्भाव की आवश्यकता होती है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि विश्व शांति का मार्ग आपसी सहयोग और समझ से होकर गुजरता है। यदि समाज इस दिशा में प्रयास करेगा तो वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव संभव है।
शांति और एकता का संदेश
जैसलमेर के चादर महोत्सव में मोहन भागवत का यह संबोधन विश्व शांति और सामाजिक सद्भाव के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने अपने संदेश में यह स्पष्ट किया कि मानवता की साझा पहचान और आपसी सम्मान ही दुनिया में स्थायी शांति की आधारशिला बन सकते हैं।



