कोलकाता में मतदाता सूची विवाद: मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। यह विरोध उस समय हुआ जब चुनाव आयोग की पूरी टीम राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंची थी।
चुनाव आयोग की इस यात्रा का उद्देश्य आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना था। हालांकि दौरे के दौरान ही मतदाता सूची से लाखों नाम हटाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया और कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गए।
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई है।

तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त
1988 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार फरवरी 2025 में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए थे। अपने कार्यकाल के दौरान यह उनका महत्वपूर्ण दौरा माना जा रहा है।
8 मार्च को वे चुनाव आयोग की पूरी टीम के साथ पश्चिम बंगाल पहुंचे। इस दौरान उनका तीन दिवसीय कार्यक्रम तय किया गया था।
इस कार्यक्रम के तहत चुनाव आयोग ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची के अद्यतन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
चुनाव आयोग का कहना है कि इन बैठकों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर विवाद
मुख्य विवाद 2025 की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की गई थी।
जानकारी के मुताबिक इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 58 लाख नाम हटाए गए। चुनाव आयोग के अनुसार इनमें से लगभग 24 लाख नाम ऐसे लोगों के थे जो अब जीवित नहीं हैं, जबकि करीब 12 लाख नाम ऐसे मतदाताओं के बताए गए जो लापता हैं या लंबे समय से अपने पते पर नहीं रहते।
चुनाव आयोग का दावा है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए की गई है। आयोग का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।
लेकिन इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद पैदा हो गया है।

कोलकाता में विरोध प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त के दौरे के दौरान कोलकाता में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।
प्रदर्शनकारियों ने एयरपोर्ट, होटल और कालीघाट मंदिर के बाहर नारेबाजी की और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची से कई असली मतदाताओं के नाम भी हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि इससे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इस दौरान पुलिस और प्रशासन को भी स्थिति संभालने के लिए सक्रिय रहना पड़ा।
ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
टीएमसी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से कई वास्तविक मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि इससे हजारों लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाया गया है तो उसे तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।
बीजेपी ने आरोपों को बताया राजनीति
वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक नाटक है और इसका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना है।
सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि मतदाता सूची से हटाए गए कई नाम ऐसे लोगों के थे जो अवैध रूप से सूची में शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के अनुसार की गई है।
विरोध के बीच शांत रहे मुख्य चुनाव आयुक्त
विरोध प्रदर्शन के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने पूरे दौरे के दौरान शांत और संयमित रवैया बनाए रखा।
अपने कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में दर्शन भी किए। मंदिर से बाहर निकलते समय उन्होंने लोगों का अभिवादन किया और “जय भारत” कहा।
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि आयोग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता के साथ कर रहा है और किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक गतिविधियां पहले ही तेज हो चुकी हैं।
मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।
हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्राथमिकता केवल निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है।



