शेयर बाजार में जोरदार वापसी: सेंसेक्स 900 अंक उछला, निफ्टी 24,765 पर बंद; रुपया भी मजबूत

बॉम्बे शेयर बाजार में जोरदार वापसी: सेंसेक्स 900 अंक उछला, निफ्टी 24,765 पर बंद; रुपया भी मजबूत

कई दिनों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू बाजारों ने वैश्विक बाजारों के सकारात्मक संकेतों के बीच मजबूत वापसी की और प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 900 अंक चढ़कर 80 हजार के स्तर के ऊपर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 285 अंकों की बढ़त के साथ 24,765 के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 899.71 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80,015.90 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,187.64 अंक तक चढ़ गया था, जो निवेशकों की मजबूत लिवाली को दर्शाता है। वहीं पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 285.40 अंक यानी 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,765.90 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में भी पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का दौर समाप्त हो गया।

भारतीय शेयर बाजार में तेजी के साथ सेंसेक्स 900 अंक चढ़ा 

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी

सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। प्रमुख रूप से अदाणी पोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में अच्छी बढ़त देखने को मिली। इन कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी के कारण बाजार को मजबूती मिली।

हालांकि सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में गिरावट देखी गई। टेक्नोलॉजी और कुछ उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में दबाव रहने के कारण इनका प्रदर्शन कमजोर रहा।

वैश्विक कारकों का बाजार पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में आई तेजी का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही थी। हालांकि गुरुवार को निवेशकों की घबराहट में कुछ कमी आई और बाजार में खरीदारी बढ़ी।

ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के अनुसार भारतीय शेयर बाजार एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए हैं और पिछले कुछ दिनों की तेज गिरावट पर विराम लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन निवेशक अब सतर्क तरीके से कारोबार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के कारोबारी सत्रों में जो घबराहट देखने को मिली थी, उसमें अब कमी आई है। इसका संकेत इंडिया उतार चढ़ाव सूचकांक यानी इंडिया वीआईएक्स में गिरावट से भी मिलता है, जो हाल के उच्च स्तर से 15 प्रतिशत से अधिक नीचे आ गया है।

पेट्रोलियम कंपनियों के शेयरों में सुधार

पिछले दो दिनों की गिरावट के बाद पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के शेयरों में भी गुरुवार को सुधार देखा गया। बाजार में निचले स्तर पर लिवाली बढ़ने के कारण हिंदुस्तान पेट्रोलियम का शेयर 4.19 प्रतिशत चढ़ गया। इसके अलावा भारत पेट्रोलियम का शेयर 1.19 प्रतिशत और इंडियन ऑयल का शेयर 0.59 प्रतिशत बढ़ गया।

इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना हुआ था। गुरुवार को बाजार में सुधार के साथ इन कंपनियों के शेयरों में भी तेजी लौटी।

इस बीच वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.84 प्रतिशत बढ़कर 82.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर ऊर्जा कंपनियों और व्यापक बाजार पर पड़ता है।

डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया

शेयर बाजार में तेजी के साथ ही भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए 45 पैसे की बढ़त के साथ 91.60 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।

घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप की खबरों ने रुपये को समर्थन दिया। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने बाजार में हस्तक्षेप किया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.16 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 91.30 के उच्च स्तर तक पहुंच गया। दिन के अंत में यह 91.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र की तुलना में 45 पैसे की मजबूती दर्शाता है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है। इससे पहले बुधवार को रुपया 56 पैसे टूटकर 92.05 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को भी इसमें 41 पैसे की गिरावट आई थी।

कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए राहत भरा रहा। शेयर बाजार में मजबूत वापसी और रुपये में सुधार ने संकेत दिया है कि हाल की गिरावट के बाद बाजार में स्थिरता लौटने लगी है, हालांकि वैश्विक परिस्थितियों के कारण आगे भी उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

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