मैनपुरी में जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर उप निबंधक का एक दिन का वेतन रोकने का कड़ा आदेश जारी किया है।
प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप आम जनता की शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। वॉइस ऑफ मैनपुरी से जुड़े प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की जब उच्च स्तर पर समीक्षा की गई, तो शिकायतकर्ताओं से मिले फीडबैक में असंतोष सामने आया। इस पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कदम उठाया गया है।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर प्रशासन का स्पष्ट संदेश
समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों में दर्ज करने की प्रवृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि हर पीड़ित नागरिक की समस्या का जमीनी स्तर पर समाधान होना चाहिए। असंतुष्ट फीडबैक मिलने के बाद उप निबंधक का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं और साथ ही स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है।
जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि भविष्य में बिना स्थलीय निरीक्षण या बिना शिकायतकर्ता की संतुष्टि के आख्या लगाई गई, तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध और अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
समीक्षा बैठक के प्रमुख बिंदु और निर्देश:
- गुणवत्तापूर्ण निस्तारण: सभी विभाग प्रमुख जनसुनवाई की शिकायतों का समयबद्ध और संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित करें।
- फीडबैक प्रणाली पर निगरानी: समाधान के बाद शिकायतकर्ता से सीधे संवाद कर उनकी संतुष्टि की पुष्टि की जाएगी।
- कार्यालयीन अनुशासन: बिना पूर्व सूचना के कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने या जनसेवा में देरी करने पर सीधे वेतन अवरुद्ध होगा।
- जीरो टॉलरेंस नीति: भ्रष्टाचार और शासकीय कार्यों में शिथिलता के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।
प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से जहां लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है, वहीं आम जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है कि शासन उनके हकों और समस्याओं के प्रति पूरी तरह सजग व प्रतिबद्ध है।
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