राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाते हुए सीमा पार से ड्रोन द्वारा हथियार और हेरोइन सप्लाई करने वाले बड़े नार्को-टेरर सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है। केंद्र सरकार की आतंकवाद और ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की है।
सीमा पार से रची जा रही थी नापाक साजिश
जांच में सामने आया है कि विदेशी धरती पर बैठे आतंकी आका आधुनिक ड्रोन तकनीक का दुरुपयोग कर भारतीय सीमा में घातक हथियार, गोला-बारूद और हेरोइन की खेप गिरा रहे थे। इस सिंडिकेट का मुख्य मकसद तस्करी से मिलने वाले पैसे से देश विरोधी गतिविधियों को हवा देना था। हालांकि, देश की खुफिया एजेंसियों और एनआईए के मजबूत समन्वय ने देश के खिलाफ इस नापाक मंसूबे को समय रहते विफल कर दिया।
वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में रडार और अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम को मजबूत किए जाने के बाद से लगातार ऐसे अवैध प्रयासों को चिन्हित कर ध्वस्त किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने पंजाब, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में फैले इस नेटवर्क के प्रमुख गुर्गों के ठिकानों पर दबिश देकर महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज जुटाए हैं।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु और जांच के प्रमुख पहलू:
- ड्रोन रूट की पहचान: सीमावर्ती इलाकों में जिन मार्गों से ड्रोन की आवाजाही हो रही थी, उनकी जीपीएस मैपिंग कर नेटवर्क को ट्रैक किया गया।
- वित्तीय फंडिंग पर प्रहार: हेरोइन की बिक्री से उत्पन्न हवाला और ड्रग मनी के लेन-देन से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
- स्थानीय संपर्कों की धरपकड़: खेप को रिसीव करने और आगे पहुंचाने वाले स्थानीय ओवरग्राउंड वर्करों की पहचान कर उन पर शिकंजा कसा गया है।
सुरक्षा तंत्र हुआ और अधिक सशक्त
प्रशासन और सुरक्षा बल सीमावर्ती नागरिकों के साथ मिलकर सुरक्षा को और सुदृढ़ कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान सरकार द्वारा सीमाओं पर तकनीक आधारित निगरानी बढ़ाने से इस तरह के नेटवर्क अब अधिक दिनों तक सक्रिय नहीं रह पा रहे हैं। एनआईए की यह कड़ी कार्रवाई देश की संप्रभुता की रक्षा और युवाओं को नशीले पदार्थों के जाल से बचाने की दिशा में एक बेहद ठोस कदम साबित होगी।
(Image Credit: abplive.com)






