मैनपुरी में रातभर हुई झमाझम बारिश से धान की फसल को नया जीवन मिला है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और जिले में बंपर पैदावार की उम्मीद मजबूत हुई है। उमस भरी गर्मी से जूझ रहे आम जनमानस को जहां तापमान में गिरावट से सुकून मिला है, वहीं यह मानसूनी फुहारें कृषि क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही हैं।
किसानों की लागत घटी, फसल को मिला प्राकृतिक पोषण
जनपद के विभिन्न ग्रामीण व शहरी इलाकों में देर रात शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रुक-रुककर सुबह तक जारी रहा। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान को इस समय पर्याप्त पानी की सख्त दरकार थी। बारिश होने से किसानों को निजी नलकूपों और डीजल पंपों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे उनकी खेती की लागत में सीधी कमी आएगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बारिश का पानी धान की जड़ों को मजबूत करने और कल्ले फूटने में बेहद सहायक होता है। इस झमाझम वर्षा से फसलों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है:
- लागत में भारी बचत: सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर होने वाला अतिरिक्त खर्च अब बच सकेगा।
- प्राकृतिक नाइट्रोजन की आपूर्ति: आकाशीय बिजली और बारिश के पानी से मिट्टी को प्राकृतिक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है।
- भूजल स्तर में सुधार: लगातार हुई बारिश से क्षेत्र के गिरते ग्राउंड वाटर लेवल को रीचार्ज होने में बड़ी मदद मिलेगी।
प्रशासन सतर्क, किसानों को हर स्तर पर मिल रहा सरकारी संबल
बारिश के चलते कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी, जिसे स्थानीय प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘किसान हित सर्वोपरि’ निर्देश के अनुरूप जिला कृषि विभाग पूरी तरह सक्रिय है। अधिकारियों की टीमें लगातार फील्ड में रहकर फसलों की स्थिति का जायजा ले रही हैं और किसानों को उचित जल निकासी तथा कीट प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रही हैं।
राज्य सरकार द्वारा नहरी प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और निर्बाध बिजली आपूर्ति की पहले से की गई व्यवस्थाओं के बीच इस प्राकृतिक वर्षा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नया उत्साह भर दिया है। अन्नदाता अब आगामी दिनों में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद संजोए हुए हैं।
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