मैनपुरी कलेक्ट्रेट परिसर में अपने बेटे के लिए न्याय की मांग को लेकर बुजुर्ग माता-पिता आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, जिस पर स्थानीय प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया है।
जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त गहमागहमी बढ़ गई जब एक पीड़ित परिवार अपने दिवंगत पुत्र के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर अनशन पर बैठ गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा था, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, जैसे ही मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया, प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया।
वॉइस ऑफ मैनपुरी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कलेक्ट्रेट पर धरने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पीड़ित दंपती से बेहद संवेदनशीलता के साथ बातचीत की और उनकी हर एक बात को गंभीरता से सुना।
प्रशासन का सकारात्मक रुख और निष्पक्ष जांच का आश्वासन
उत्तर प्रदेश सरकार की अपराध और अन्याय के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और मामले की पुनरीक्षा कर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
- संवेदनशील संवाद: वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग माता-पिता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराने का प्रयास किया।
- समयबद्ध जांच: मामले से संबंधित सभी साक्ष्यों की निष्पक्ष और त्वरित समीक्षा के निर्देश जारी किए गए हैं।
- पारदर्शिता की गारंटी: अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और बिना किसी दबाव के होगी।
अधिकारियों का कहना है कि शासन की प्राथमिकता हर नागरिक को समय पर पारदर्शी न्याय दिलाना है। कलेक्ट्रेट स्तर पर परिजनों की मांगों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, ताकि इस संवेदनशील मामले का शीघ्र और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
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