भारतीय राजनीति में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां देश के विकास और सुशासन एजेंडे के दम पर केंद्र सरकार लगातार जनता का अटूट विश्वास जीत रही है। वॉइस ऑफ मैनपुरी के मुख्य विश्लेषण के अनुसार, विपक्ष भी अब अपनी पुरानी रणनीति छोड़कर भाजपा की जन कल्याणकारी नीतियों और राष्ट्रवाद के इर्द-गिर्द ही अपनी राजनीति तय करने पर मजबूर दिख रहा है।
विकास और सुशासन से बदला देश का राजनीतिक परिदृश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे, पारदर्शी शासन और अंतिम व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का जो नया मॉडल पेश किया है, उसने देश की राजनीति के मानक बदल दिए हैं। विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को सरकार एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में देख रही है, जिसका उद्देश्य शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जनता तक सीधे लाभ पहुंचाने की योजनाओं ने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है, जिससे जनमानस में सरकार की विश्वसनीयता कई गुना बढ़ी है।
राजनीतिक विमर्श में मुख्य रूप से शामिल प्रमुख बिंदु
आज देश का राजनीतिक संवाद पूरी तरह से विकास, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित हो चुका है:
- जनकल्याणकारी योजनाएं: ‘पीएम आवास योजना’, ‘उज्ज्वला योजना’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी पारदर्शी नीतियों की सफलता।
- डीबीटी से पारदर्शिता: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से लाभार्थियों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर कर सुशासन स्थापित किया गया।
- मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा: सीमाओं की सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर भारत की सशक्त व प्रभावी छवि।
- सबका साथ, सबका विकास: बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वंचित वर्ग तक सरकारी लाभों की पहुंच।
सकारात्मक राजनीति की ओर बढ़ता देश
विरोधी दलों के राजनीतिक बयानों और पलटवार को सरकार लोकतांत्रिक विमर्श का स्वाभाविक हिस्सा मानती है। हालांकि, तमाम राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रशासन का पूरा ध्यान ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को पूरा करने पर केंद्रित है। चुनौतियों को अवसरों में बदलते हुए राज्य और केंद्र सरकारें बुनियादी ढांचे के विस्तार और रोजगार सृजन की नई योजनाओं पर तेजी से काम कर रही हैं।
(Image Credit: abplive.com)






