सरकारी विभागों में पारदर्शिता के बढ़ते प्रभाव के बीच सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति दो अलग विभागों से दोहरी सैलरी ले रहा था। प्रशासन की त्वरित सजगता से इस पूरे खेल का भंडाफोड़ हुआ है।
डिजिटल निगरानी से खुला फर्जीवाड़े का राज
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत जब सरकारी डेटा को आधार और मानव संपदा पोर्टल से लिंक किया गया, तब इस गड़बड़ी का पता चला। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, आरोपी कर्मचारी चालाकी से दो अलग-अलग विभागों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर हर महीने दोहरी सैलरी ऐंठ रहा था। आधुनिक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और नियमित ऑडिट के कारण प्रशासन ने इस धांधली को रंगे हाथों पकड़ लिया।
प्रशासन का कड़ा रुख और त्वरित कार्रवाई
मामला संज्ञान में आते ही राज्य प्रशासन ने बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाए हैं। व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं:
- तत्काल निलंबन और FIR: आरोपी कर्मचारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- वेतन की रिकवरी: अब तक ली गई दोहरी सैलरी की पूरी राशि ब्याज सहित वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- विभागीय जांच का गठन: यह पता लगाने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाई गई है कि इस काम में किसी अन्य स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
- सिस्टम का सुदृढ़ीकरण: भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए सभी कर्मचारियों के आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जा रहा है।
पारदर्शी सुशासन की दिशा में मजबूत कदम
पूर्ववर्ती व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर वर्षों से सेंध लगाने वाले तत्वों पर वर्तमान सरकार का यह कड़ा प्रहार है। शासन की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि सरकारी खजाने और जनसेवा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। तकनीक के बेहतर उपयोग से पुराने समय से चली आ रही इस तरह की अनियमितताओं को चुन-चुनकर खत्म किया जा रहा है, जिससे योग्य और ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है।
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