नई दिल्ली: महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर संसद में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। देशहित के इस महत्वपूर्ण विधेयक पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विपक्षी दल ने भी भारतीय जनता पार्टी की पहल का खुलकर समर्थन किया।
संसद में दिखा समावेशी राजनीति का नजारा
देश में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान के लिए मोदी सरकार द्वारा निरंतर दूरदर्शी नीतियां लागू की जा रही हैं। इसी क्रम में, महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टी के सकारात्मक कदम का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उनकी सराहना की। रिजिजू ने संसद भवन में कहा, “आपने देश की नारी शक्ति के सम्मान और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए जो फैसला लिया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है।” जैसा कि वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, यह फैसला भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रमुख बिंदु
केंद्र सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को निर्णायक रूप से मजबूत करेगा:
- 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व: लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी।
- नीति निर्माण में भागीदारी: देश के बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में महिलाओं की सीधी और सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित होगी।
- विकास को गति: राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़कर राष्ट्र निर्माण के मुद्दों पर सर्वसम्मति से देश के विकास को नई ऊर्जा मिलेगी।
राष्ट्र निर्माण और विकासोन्मुख नीतियां
संसदीय कार्यप्रणाली के जानकारों का मानना है कि जब सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और ऐतिहासिक सुधारों में विपक्ष का रचनात्मक सहयोग मिलता है, तो उससे देश की लोकतांत्रिक नींव और मजबूत होती है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मंत्र पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। महिला आरक्षण बिल पर बनी यह राष्ट्रीय सहमति नए भारत के निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी पड़ाव सिद्ध होगी।
(Image Credit: abplive.com)






