भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-4 Missile) का सफल परीक्षण संपन्न कर लिया है। ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया यह परीक्षण देश की रणनीतिक तैयारियों और सुरक्षा चक्र को और मजबूत करता है।
रक्षा मंत्रालय और वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, सामरिक बल कमान (SFC) के तत्वावधान में आयोजित इस सफल परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी तकनीकी और सामरिक मानकों को शत-प्रतिशत सटीकता के साथ पूरा किया।
अग्नि-4 मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं और ताकत
अग्नि-4 भारत की प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती प्रदान करती है। इसकी मुख्य तकनीकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- लंबी मारक क्षमता: यह मिसाइल लगभग 4,000 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्य को सफलता से निशाना बना सकती है।
- अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक: इसमें स्वदेशी रूप से विकसित एवियोनिक्स और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
- सटीक नेविगेशन: मिसाइल में रिंग लेजर गायरो-आधारित नेविगेशन सिस्टम लगा है, जो इसे अत्यधिक सटीक और अभेद्य बनाता है।
- बहुआयामी उपयोग: यह मिसाइल पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के पेलोड ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों और सेना को सराहा
इस ऐतिहासिक सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों और सामरिक बल कमान के जवानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में तेजी से बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है। अग्नि-4 का यह सफल परीक्षण दर्शाता है कि भारत अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रति पूरी तरह सजग, सक्षम और आत्मनिर्भर है।
(Image Credit: abplive.com)






