लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, अनशन तोड़ने के तुरंत बाद वांगचुक ने साफ किया कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसे कई शर्तों के आधार पर अस्थायी रूप से विराम दिया गया है।
किन शर्तों पर समाप्त हुआ भूख हड़ताल?
लेह में जनसमुदाय को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से सकारात्मक संदेश मिलने और स्थानीय अपेक्स बॉडी व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के अनुरोध के बाद उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन खत्म किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार अपने वादों से पीछे हटती है, तो वे फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
सोनम वांगचुक के बयान की मुख्य बातें:
- वार्ता की बहाली: केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ आगामी दिसंबर माह में आधिकारिक वार्ता फिर से शुरू करने का आश्वासन दिया है।
- छठी अनुसूची की मांग: लद्दाख के नाजुक पर्यावरण और जनजातीय संस्कृति को बचाने के लिए संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) लागू करना अनिवार्य है।
- सशर्त कदम: वांगचुक ने स्पष्ट किया, “मैंने कई शर्तों पर अपना अनशन तोड़ा है। जब तक लद्दाख को उसके अधिकार नहीं मिल जाते, हमारा शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा।”
- युवाओं और लोकतंत्र की सुरक्षा: लद्दाख के युवाओं के लिए रोजगार और पूर्ण राज्य के दर्जे के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना इस आंदोलन की प्राथमिकता है।
लद्दाख में क्यों गहराया है असंतोष?
साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से ही स्थानीय निवासी अपनी भूमि, संस्कृति और रोजगार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। सोनम वांगचुक पिछले कई महीनों से शून्य से नीचे तापमान में भी भूख हड़ताल कर लद्दाख की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
(Image Credit: abplive.com)






