मैनपुरी, 22 फरवरी 2026 उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिला कारागार के बंदियों द्वारा तैयार की गई पारंपरिक तारकशी कला इन दिनों ताज महोत्सव 2026 में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आगरा के प्रसिद्ध शिल्पग्राम में लगे स्टॉल पर बंदियों के हुनर की झलक देखने को मिल रही है, जहां देश-विदेश से आए पर्यटक इन उत्पादों को न केवल सराह रहे हैं, बल्कि खरीद भी रहे हैं।
पारंपरिक कला को नया आयाम


तारकशी उत्तर प्रदेश की एक प्राचीन शिल्प कला है, जिसमें लकड़ी पर बारीक धातु की तार जड़कर आकर्षक डिजाइन बनाए जाते हैं। यह कला धैर्य, सटीकता और महीन कारीगरी की मांग करती है। मैनपुरी जिला कारागार में स्थापित कार्यशाला में बंदियों को इसी कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वर्तमान में आठ बंदी प्रतिदिन प्रशिक्षण लेकर विभिन्न प्रकार के सजावटी और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनमें आभूषण बॉक्स, ट्रे, फोटो फ्रेम, दीवार सजावट सामग्री और स्मृति चिह्न प्रमुख हैं। इन उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइनिंग ने ताज महोत्सव में आने वाले लोगों को खासा प्रभावित किया है।

पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल
जिला कारागार प्रशासन की यह पहल केवल कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बंदियों का सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास भी है। कारागार में स्थापित कार्यशाला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रही है, जिससे वे सजा पूरी होने के बाद आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
जेल अधीक्षक शशांक पांडेय ने बंदियों और स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास बंदियों में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियां बंदियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करती हैं।
ताज महोत्सव में मिल रही सराहना
आगरा के शिल्पग्राम में आयोजित ताज महोत्सव 2026 में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं। ऐसे में मैनपुरी जेल के बंदियों का स्टॉल अपनी अनूठी पहचान बना रहा है।
पर्यटक न केवल उत्पादों की बारीक कारीगरी की प्रशंसा कर रहे हैं, बल्कि यह जानकर भी प्रभावित हो रहे हैं कि इन्हें जेल में निरुद्ध बंदियों ने तैयार किया है। कई आगंतुकों ने इसे एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल बताया।
बिक्री में भी मिल रही सफलता
तारकशी उत्पादों की मांग ताज महोत्सव में लगातार बढ़ रही है। स्टॉल पर आने वाले लोग स्मृति चिह्न के रूप में इन वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं। इससे बंदियों का उत्साह भी बढ़ा है।
कारागार प्रशासन के अनुसार, बिक्री से प्राप्त आय का एक हिस्सा बंदियों के खाते में जमा किया जाता है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। यह व्यवस्था उन्हें श्रम के प्रति सम्मान और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराती है।
सामाजिक संदेश भी दे रही पहल
मैनपुरी जिला कारागार की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपनी प्रतिभा से नई पहचान बना सकता है। ताज महोत्सव जैसे बड़े मंच पर बंदियों की कला को प्रदर्शित करना उनके पुनर्वास कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रमों को और विस्तार दिया जाए, तो कारागार प्रणाली में सकारात्मक बदलाव संभव है।



